राजधानी के प्रभात चौराहा स्थित रोशन अस्पताल भोपाल एक्सपायरी दवा मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। यहाँ इलाज के लिए पहुंचे एक दो साल के मासूम बच्चे को अस्पताल परिसर के अंदर स्थित मेडिकल स्टोर से एक्सपायरी (समयसीमा समाप्त) दवा बेच दी गई। परिजनों ने अनजाने में वह दवा बच्चे को पिला भी दी। गनीमत यह रही कि दवा पीने के बाद बच्चे की सेहत पर कोई बुरा असर नहीं पड़ा और वह पूरी तरह स्वस्थ है। हालांकि, जैसे ही परिजनों को इस खतरनाक लापरवाही का पता चला, उन्होंने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
रोशन अस्पताल भोपाल एक्सपायरी दवा मामले की पूरी सच्चाई
मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित पिता पवन पटवा अपने दो साल के बेटे सेजल पटवा को लेकर इलाज के लिए प्रभात चौराहे पर स्थित रोशन अस्पताल पहुंचे थे। डॉक्टर को दिखाने के बाद परिजनों ने पर्ची के मुताबिक अस्पताल के ही मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदीं।
घर पहुंचने पर जब बच्चे को दवा की खुराक दी गई और उसके बाद परिजनों की नजर बोतल पर छपी एक्सपायरी डेट पर पड़ी, तो उनके होश उड़ गए। दवा की मियाद बहुत पहले खत्म हो चुकी थी। इस गंभीर चूक के तुरंत बाद परिजन वापस अस्पताल पहुंचे और रोशन अस्पताल भोपाल एक्सपायरी दवा मामला को लेकर कड़ा विरोध जताया।
बच्चों की सेहत से खिलवाड़: परिजनों ने दी चेतावनी
बच्चे के पिता पवन पटवा और अन्य परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन को खरी-खोटी सुनाते हुए कहा कि छोटे बच्चों के इलाज में इस प्रकार की घोर लापरवाही किसी की भी जान के लिए खतरनाक साबित हो सकती थी। परिजनों का कहना था कि यदि एक्सपायरी सिरप का कोई विपरीत रिएक्शन हो जाता, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी किसकी होती? हंगामे के दौरान परिजनों ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
अस्पताल संचालक डॉ. राकेश कुकरेजा का पक्ष
अस्पताल में बढ़ते विरोध और हंगामे को देखते हुए प्रबंधन ने अपनी गलती मानी और बच्चे को सही व सुरक्षित उपचार देने का आश्वासन दिया।
इस बहुचर्चित रोशन अस्पताल भोपाल एक्सपायरी दवा मामला पर सफाई देते हुए अस्पताल के संचालक डॉ. राकेश कुकरेजा ने कहा:
“अस्पताल का मेडिकल स्टोर आउटसोर्स (ठेके) पर दिया गया है। दवा देने में जो गंभीर गलती हुई है, वह मेडिकल स्टोर के काउंटर पर बैठे स्टाफ की ओर से हुई है। इसमें अस्पताल प्रशासन की सीधी गलती नहीं है। फिर भी, यह मामला बहुत संवेदनशील है और हम इसकी पूरी निष्पक्ष जांच करवाएंगे ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।”
स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर उठ रहे बड़े सवाल
इस घटना के बाद शहर के कई बुद्धिजीवियों और मरीजों ने स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन और ड्रग डिपार्टमेंट की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि क्या अस्पतालों के अंदर चलने वाले मेडिकल स्टोर्स की समय-समय पर जाँच नहीं की जाती?
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