खातेगांव TI मर्डर केस में बड़ा खुलासा: बोगस लाइसेंस, बेनामी पेट्रोल पंप और गुजरात तक फैले तार, ऐसे चकमा दे रहे थे शराब माफिया!

खातेगांव TI मर्डर केस

खातेगांव TI मर्डर केस: देवास के खातेगांव थाना प्रभारी (TI) दिलीप पूरी की हत्या के मामले में पुलिस जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, शराब माफियाओं के काले साम्राज्य की परतें उधड़ती जा रही हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपी बेहद शातिर तरीके से अपना अवैध शराब कारोबार चला रहे थे और कानून की नजरों से बचने के लिए उन्होंने एक पूरा ताना-बाना बुन रखा था। 

नाम किसी का, दुकान किसी और की: ‘इंटरचेंज’ का खेल : खातेगांव TI मर्डर केस

पुलिस पड़ताल में पता चला है कि आरोपी बड़वानी निवासी पाटेंद्र जायसवाल के पास टिमरनी की शराब दुकान का लाइसेंस है, लेकिन वहां का सारा जिम्मा राहुल जायसवाल संभाल रहा था। वहीं, बड़वानी की दुकान का लाइसेंस मनीष जायसवाल के नाम पर है, जिसे पाटेंद्र चला रहा था।

कागजों में नाम बदलकर दुकानें चलाने के पीछे इनकी शातिर मंशा यह थी कि अगर कभी पकड़े भी जाएं, तो कोर्ट में लोकेशन और लाइसेंस का बहाना बनाकर आसानी से बच निकलें।

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शराब के पैसे से खड़ा किया बेनामी पेट्रोल पंप?

दस्तावेजों की जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि टिमरनी की जिस दुकान का लाइसेंसी पाटेंद्र है, उसे राहुल ने किराए पर ले रखा था। इतना ही नहीं, माफिया राहुल टिमरनी में जो पेट्रोल पंप चला रहा था, वह कागजों में जबलपुर की एक आदिवासी महिला के नाम पर दर्ज है।

पुलिस को शक है कि राहुल ने अवैध शराब की काली कमाई से ही यह पंप खोला था। अपने शराब के धंधे को छिपाने के लिए वह इस पंप को ढाल की तरह इस्तेमाल करता था। अब इस पूरे आर्थिक लेन-देन का हिसाब-किताब लगाने के लिए पुलिस आयकर विभाग (IT) को पत्र लिख रही है। इसके अलावा आरोपियों की बसें भी जब्त की जा रही हैं।

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वाइन शॉप का मैनेजर रिमांड पर, गुजरात तक पहुंची पुलिस की रेड

हत्याकांड की जांच में टिमरनी वाइन शॉप के मैनेजर भूपेंद्र राणा को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश कर रिमांड पर ले लिया है। वहीं, फरार चल रहे मुख्य आरोपियों—मनीष, मोहिन और पाटेंद्र की तलाश में पुलिस की कई टीमें अलग-अलग राज्यों में छापेमारी कर रही हैं। एक विशेष टीम गुजरात भी भेजी गई है।

FASTag डेटा से खुला शराब तस्करी का पूरा रूट

एसपी आदित्य मिश्रा के मुताबिक, आरोपी जिस गाड़ी से शराब की तस्करी करते थे, उसके FASTag का पिछले 6 महीने का पूरा डेटा निकाला गया है। टोल प्लाजा के रिकॉर्ड से खुलासा हुआ है कि यह गाड़ी लगातार राऊ, पीथमपुर और आलीराजपुर वाले रास्ते से गुजरती थी। जिस मैकेनिक ने तस्करी के लिए वाहन को मॉडिफाई किया था, उसे भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

डायरी से खुले राज: पार्टनरशिप और कैश प्रॉफिट का हिसाब

पुलिस ने हरदा और टिमरनी की तीन शराब दुकानों के कंबाइंड ऑफिस पर छापा मारकर अहम दस्तावेज जब्त किए हैं। मौके से मिली डायरी और कागजों से साफ हुआ है कि तीनों पार्टनरों के बीच कैश प्रॉफिट का बंटवारा कैसे होता था। पुलिस ने मौके से बड़ी मात्रा में नकद राशि और खास बैच नंबर वाली शराब के दस्तावेज भी कब्जे में लिए हैं।

इंदौर और आलीराजपुर पहुंचीं पुलिस टीमें

  • विजय राव पर शिकंजा: आरोपी विजय राव को लेकर एक टीम इंदौर गई है। पुलिस यह जांच रही है कि क्या विजय राव ने इससे पहले भी आरोपियों को कानूनी दांव-पेच और अदालती कार्रवाई में मदद पहुंचाई थी।

  • आलीराजपुर रूट की पड़ताल: एक अन्य टीम आलीराजपुर की तरफ भेजी गई है, जो यह पता लगा रही है कि वहां से शराब की सप्लाई कैसे होती थी और इस नेटवर्क में कौन-कौन शामिल है।

  • बैंक खातों पर नजर: आरोपी की पत्नी और कियोस्क खातों से गाड़ी की बैंक फाइनेंस किस्तें कटने की जानकारी भी सामने आई है।

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शेखर मामले में पुलिस की चुप्पी, आबकारी विभाग में बड़ा फेरबदल

चंदाना शराब कांड से जुड़े शिप्रा वाइन शॉप के शेखर की भूमिका पर भी देवास पुलिस जांच कर रही है। शेखर को एक मामले में जमानत मिल गई थी, लेकिन पुलिस ने उसे जेल से निकलते ही सिविल लाइन थाने के एक अन्य प्रकरण में हिरासत में ले लिया। हालांकि, नए दर्ज मामलों को लेकर पुलिस अधिकारी फिलहाल आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं।

दूसरी तरफ, इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक स्तर पर गाज गिरी है। देवास कलेक्टर ने आबकारी विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्यक्षेत्र बदल दिए हैं (रीशफलिंग की है)। इससे पहले मामले में लापरवाही बरतने पर तीन आबकारी निरीक्षकों को निलंबित भी किया जा चुका है।