नाम हटाने का अजीब सौदा: STF दारोगा ने मांगी गाय-भैंस और कुत्ता; ऑडियो-स्क्रीनशॉट के बाद दर्ज हुई एफआईआर

नाम हटाने का अजीब सौदा: STF दारोगा ने मांगी गाय-भैंस और कुत्ता; ऑडियो-स्क्रीनशॉट के बाद दर्ज हुई एफआईआर

नाम हटाने का अजीब सौदा: STF दारोगा ने मांगी गाय-भैंस और कुत्ता; ऑडियो-स्क्रीनशॉट के बाद दर्ज हुई एफआईआर

यशभारत प्रयागराज/हिसार: उत्तर प्रदेश पुलिस की एसटीएफ (STF) में तैनात एक दारोगा पर रिश्वत मांगने का बेहद अनोखा और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। प्रयागराज के नवाबगंज थाने में दर्ज शराब तस्करी के एक मामले से आरोपी का नाम हटाने के बदले दारोगा रणेंद्र कुमार सिंह पर दो गाय, एक भैंस, एक जर्मन शेफर्ड कुत्ता और 35 हजार रुपये मांगने का आरोप लगा है। शिकायतकर्ता की ओर से मिले ऑडियो और स्क्रीनशॉट की जांच के बाद हिसार मंडल के एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने आरोपी दारोगा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।

1 फरवरी को फोन कर मांगी थी दो गाय हिसार जिले के ब्यानाखेड़ा गांव निवासी मनवीर सिंह उर्फ मन्नू ने 17 फरवरी 2026 को एसीबी (ACB) में लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में मनवीर ने बताया कि प्रयागराज के नवाबगंज थाने में दर्ज शराब तस्करी के केस से नाम निकालने के बदले एसटीएफ दरोगा रणेंद्र कुमार सिंह ने दो गाय-भैंस, जर्मन शेफर्ड नस्ल का कुत्ता और कार्यालय के लिए कुर्सी-मेज खरीदने के नाम पर 35 हजार रुपये की मांग की थी।

मनवीर के अनुसार, दरोगा ने 1 फरवरी को फोन कर दो गाय देने को कहा था, जिन्हें उसने 3 फरवरी को भेज दिया था। इसके बाद 9 फरवरी को दरोगा ने फिर फोन कर एक और गाय तथा एक भैंस भेजने का दबाव बनाया।

जांच के बाद गृह विभाग की मंजूरी से दर्ज हुई FIR एसीबी (ACB) ने शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए ऑडियो रिकॉर्डिंग और व्हाट्सएप मैसेज के स्क्रीनशॉट की गहन जांच की और 15 जुलाई को अपनी जांच रिपोर्ट हरियाणा के डीजी को सौंपी। इसके बाद 14 अगस्त 2026 को प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति मिलने पर 6 अक्तूबर को आरोपी एसटीएफ दरोगा के खिलाफ औपचारिक रूप से एफआईआर दर्ज की गई।

2023 में दर्ज हुआ था अवैध शराब तस्करी का मामला उल्लेखनीय है कि 2 सितंबर 2023 को प्रयागराज के नवाबगंज थाने में हरियाणा से बिहार ले जाई जा रही अवैध अंग्रेजी शराब की तस्करी का केस दर्ज हुआ था। इस मामले की जांच में मनवीर का नाम सामने आने पर उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर उसे गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, कुछ समय बाद उसे कोर्ट से जमानत मिल गई थी, जिसके बाद नाम निकालने के नाम पर दरोगा ने रिश्वत का यह खेल रचा।