Friday, May 22, 2026
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बीमार जिला अस्पताल को उपचार की जरूरत, फर्श पर लेट कर उपचार कराने मजबूर मरीज, हैरान करने वाली तश्वीरें आईं सामने

कटनी। (विवेक शुक्ला) वैसे तो अस्पताल मरीजों के उपचार के लिए होते हैं लेकिन कटनी के जिला अस्पताल को खुद ही इलाज की जरूरत है। बारिश के मौसम में बढ़ी बीमारियों के बीच अस्पताल में मरीजों के इलाज की उचित व्यवस्था तक नहीं है।

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इलाज की पर्याप्त व्यवस्था न होने के चलते मरीजों को फर्श पर लेट कर ही उपचार कराने को मजबूर होना पड़ रहा है। वहीं फर्श पर मरीजों का इलाज होने के चलते उन्हें दूसरे मरीजों से भी इन्फैक्शन फैलने का डर सता रहा है। जिला अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं की खस्ताहाल होने के कारण मरीजों और परिजनों को परेशानियों की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।

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गौरतलब है कि कई दशक पहले बने इस जिला अस्पताल का कायाकल्प हुआ लेकिन आवश्यकता के अनुरूप इसका विकास नहीं हो सका, जिसका खामियाजा मरीजों और उनके परिजनों को भुगतना पड़ रहा है। कुल मिलाकर जिला अस्पताल की स्थिति बद से बदतर हो गई है।
बेड संख्या बढ़ी, फिर भी समस्या बरकरार
कहने के लिए तो जिला अस्पताल 400 बिस्तर का अस्पताल है।

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इसके बावजूद भी मरीज को बेड की सुविधा नहीं मिल रही है। जिले के खंड स्तर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी संचालित हो रहे हैं, इसके बावजूद मरीज की संख्या इतनी ज्यादा बढ़ रही है कि यहां के हाल बेहाल हो गए हैं। मरीज अस्पताल के बने बरामदे में ही बोतल और इंजेक्शन लगवाने को मजबूर हैं।

बारिश के मौसम में मौसमी बीमारियों के बढ़ते मरीजों को जिला अस्पताल में चादर और कंबल तक नसीब नहीं हो रहा है। ऐसे में मानवीय संवेदनाएं भी लगातार प्रभावित हो रही हैं। फर्श पर 24 घंटे बिना कंबल-चादर के मरीजों के पड़े रहना शासन की व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े कर रही है। हर दिन यहां सैकड़ों की संख्या में मरीज फर्श पर लेटकर उपचार कराते हैं। बीमार व्यक्ति यहां स्वास्थ्य सुधार के बजाय और दूसरी बीमारी का शिकार हो रहा है।
मरीजों को जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा

जिला अस्पताल में भर्ती मरीज और उनके परिजनों को अब जनप्रतिनिधियों से व्यवस्था सुधार की अपेक्षा है। अस्पताल में मौजूद मरीजों ने कहा कि जिला अस्पताल में वार्ड और बेड की संख्या बढ़ाई जाए ताकि हमें फर्श पर लेट कर उपचार कराने को मजबूर ना होना पड़े और हमें भी बेहतर उपचार सुविधा मिल सके।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम