एक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक पर गंभीर सवाल! पीड़ित के खाते से ₹99 हजार पार होने का आरोप, न SMS आया न कॉल; महाराष्ट्र से बांग्लादेश तक पहुंची रकम!
कटनी। बैंक में जमा मेहनत की कमाई अगर खाते से निकल जाए और ग्राहक को इसकी भनक तक न लगे, तो बैंकिंग सुरक्षा पर सवाल उठना लाजिमी है। कटनी में एक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक से जुड़ा ₹99 हजार के कथित साइबर फ्रॉड का मामला सामने आया है। पीड़ित अमित तिवारी का आरोप है कि उनके खाते से एक ही यूपीआई ट्रांजैक्शन में ₹99,000 ट्रांसफर हो गए, लेकिन बैंक की ओर से न कोई SMS अलर्ट आया, न ईमेल और न ही फोन कॉल के जरिए सूचना दी गई।
मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि पीड़ित के अनुसार, साइबर सेल में शिकायत के बाद हुई पड़ताल में रकम महाराष्ट्र स्थित फिनो बैंक के खाते में ट्रांसफर होने और चंद मिनटों के भीतर बांग्लादेश में कार्ड स्वाइप के जरिए खर्च किए जाने की पुष्टि हुई।
एक ट्रांजैक्शन में ₹99 हजार, ग्राहक को सूचना क्यों नहीं?
पीड़ित द्वारा उपलब्ध कराए गए PhonePe स्क्रीनशॉट के अनुसार, 24 अक्टूबर 2026 को सुबह 11:01 बजे ₹99,000 का भुगतान सितारा खातून के नाम पर दर्ज है। स्क्रीनशॉट में एक्विटास बैंक खाते से रकम डेबिट होने का विवरण भी दिखाई देता है।
अमित तिवारी का आरोप है कि इतनी बड़ी रकम खाते से निकलने के बावजूद उन्हें समय पर कोई सूचना नहीं मिली। ऐसे में सवाल उठता है कि संबंधित खाते में अलर्ट व्यवस्था सक्रिय थी या नहीं और ट्रांजैक्शन के दौरान बैंकिंग सिस्टम ने क्या कार्रवाई की?
महाराष्ट्र से बांग्लादेश तक रकम पहुंची, पूरी कड़ी की जांच जरूरी
शिकायत के बाद सामने आए कथित घटनाक्रम ने मामले को और गंभीर बना दिया है। रकम महाराष्ट्र के फिनो बैंक खाते तक कैसे पहुंची? बांग्लादेश में कार्ड स्वाइप के जरिए भुगतान किस माध्यम से हुआ? क्या कार्ड और खाते के इस्तेमाल की पहचान हो चुकी है? और सबसे अहम—रकम को रोकने या वापस दिलाने के लिए क्या कदम उठाए गए?
इन सवालों के जवाब संबंधित बैंकों के ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड, कार्ड भुगतान के विवरण और साइबर सेल की जांच से सामने आने चाहिए।
एक्विटास बैंक की जवाबदेही पर सवाल, पीड़ित को कब मिलेगा न्याय?
ग्राहक बैंक में अपनी जमा पूंजी इसलिए रखता है कि उसका पैसा सुरक्षित रहे। ऐसे में खाते से ₹99 हजार ट्रांसफर होने और सूचना नहीं मिलने का आरोप गंभीर है। एक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक को स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित ट्रांजैक्शन के समय अलर्ट भेजा गया था या नहीं, शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई और पीड़ित की रकम वापस दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
अब सवाल केवल ₹99 हजार का नहीं, बल्कि बैंकिंग सुरक्षा, समय पर अलर्ट और ग्राहक की शिकायत पर जवाबदेही का है। पीड़ित अमित तिवारी को अपनी रकम वापस मिलेगी या नहीं, संबंधित बैंक क्या स्पष्टीकरण देंगे और जांच में वास्तविक जिम्मेदारी किसकी सामने आएगी—इन सवालों के जवाब जरूरी हैं।
नोट: ट्रांजैक्शन का विवरण उपलब्ध स्क्रीनशॉट पर आधारित है। महाराष्ट्र के फिनो बैंक खाते और बांग्लादेश में कार्ड स्वाइप संबंधी जानकारी पीड़ित के अनुसार साइबर सेल की पड़ताल में सामने आई है। संबंधित बैंकों का आधिकारिक पक्ष इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।













