महाराष्ट्र में 32 हजार पेड़ों की कटाई पर सियासी महासंग्राम: रायगढ़ के 3,000 MW प्रोजेक्ट पर विपक्ष एकजुट; CM फडणवीस बोले- ‘ग्रीन एनर्जी के लिए जरूरी’

Maharashtra CM Devendra Fadnavis

महाराष्ट्र में 32 हजार पेड़ों की कटाई पर सियासी महासंग्राम: रायगढ़ के 3,000 MW प्रोजेक्ट पर विपक्ष एकजुट; CM फडणवीस बोले- ‘ग्रीन एनर्जी के लिए जरूरी’

यशभारत वेब डेस्क: महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के कर्जत के पास टोरेंट कंपनी के प्रस्तावित 3,000 मेगावाट के बिजली प्रोजेक्ट को लेकर प्रदेश की राजनीति में जबरदस्त उबाल आ गया है। इस प्रोजेक्ट के लिए वन विभाग की 253 एकड़ जमीन आवंटित की गई है, जिसके चलते लगभग 32 हजार से अधिक पेड़ों की कटाई होनी है। पेड़ों की बलि दिए जाने की खबर सामने आते ही पूरे विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रोजेक्ट को ‘पर्यावरण के अनुकूल’ बताते हुए विपक्ष के दावों को खारिज किया है।

क्यों शुरू हुआ विवाद?

यह विवाद रायगढ़ जिले के कर्जत के पास स्थित जंगल में पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज प्रोजेक्ट (Pumped Hydro Storage Project) के निर्माण को लेकर है।

यह इलाका पुणे और रायगढ़ के बीच पड़ता है, जो भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग से करीब 20 किमी और भीमाशंकर अभयारण्य/जंगल से लगभग 16 किमी दूर है। टोरेंट कंपनी को 253 एकड़ वन भूमि आवंटित की गई है। 3,000 मेगावाट क्षमता वाले इस प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए 32,000 से अधिक हरे-भरे पेड़ों को काटा जाना है।

विपक्ष हुआ एकजुट: राज ठाकरे 28 अक्टूबर को करेंगे दौरा

पेड़ों की कटाई के मुद्दे पर कांग्रेस, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT), शरद पवार की एनसीपी (SP) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) एक सुर में विरोध कर रही हैं। विपक्ष का तर्क है कि वे विकास विरोधी नहीं हैं, लेकिन पर्यावरण की बलि देकर विकास मंजूर नहीं। सरकार को किसी वैकल्पिक बंजर जमीन का चयन करना चाहिए।  एमएनएस नेता संदीप देशपांडे ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। मनसे प्रमुख राज ठाकरे 28 अक्टूबर को प्रोजेक्ट साइट का दौरा करेंगे, जहां वे स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरणविदों के साथ बैठक कर सभा को संबोधित करेंगे।

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CM देवेंद्र फडणवीस का पलटवार: बताए प्रोजेक्ट के 3 बड़े फायदे

बढ़ते विवाद पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विपक्ष पर झूठा नैरेटिव गढ़ने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रोजेक्ट पर्यावरण को नुकसान नहीं, बल्कि ग्रीन एनर्जी के जरिए प्रदूषण कम करेगा।

यदि यह 3,000 मेगावाट बिजली कोयले (थर्मल पावर) से बनाई जाए, तो उससे होने वाले प्रदूषण को सोखने के लिए 28 करोड़ fully-grown पेड़ लगाने पड़ेंगे। यह प्रोजेक्ट उतनी ही स्वच्छ ऊर्जा देगा  थर्मल पावर से होने वाला कार्बन उत्सर्जन 40 लाख वाहनों के धुएं के बराबर होता है, जिसे यह क्लीन एनर्जी प्रोजेक्ट रोकेगा। कोयले से बिजली बनाने में सालभर में 19 अरब घनफुट पानी लगता (जो 4 लाख लोगों की सालाना जरूरत है), वह पानी इस हाइड्रो प्रोजेक्ट से बचेगा। महाराष्ट्र में 32 हजार पेड़ों की कटाई पर सियासी महासंग्राम: रायगढ़ के 3,000 MW प्रोजेक्ट पर विपक्ष एकजुट; CM फडणवीस बोले- ‘ग्रीन एनर्जी के लिए जरूरी’

“3 गुना जमीन पर लगेंगे 90 हजार पेड़”

मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि कंपनी जितनी जमीन का उपयोग करेगी, उसके बदले तीन गुना जमीन उपलब्ध कराई जाएगी और तीन गुना (लगभग 90,000) नए पेड़ लगाए जाएंगे। साथ ही इस भारी निवेश से महाराष्ट्र में रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे और उत्पादित बिजली पर पहला अधिकार महाराष्ट्र का ही होगा।