RBI का लक्ष्य: भारतीय रुपये को अंतरराष्ट्रीय करेंसी बनाने की तैयारी, डिप्टी गवर्नर ने दिए संकेत – भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने स्पष्ट किया है कि उसका दीर्घकालिक लक्ष्य भारतीय रुपये को अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विदेशी भंडार के लिए एक प्रमुख वैश्विक मुद्रा बनाना है। हाल के दिनों में करेंसी मार्केट में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदम केवल अस्थायी हैं और इनका उद्देश्य बाजार को स्थिर रखना है।
RBI के डिप्टी गवर्नर टी. रवि शंकर ने कहा कि करेंसी मार्केट में हाल ही में जो कदम उठाए गए, वे अस्थायी स्थिति को संभालने के लिए थे। उन्होंने दोहराया कि केंद्रीय बैंक का फोकस रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण (Internationalisation of Rupee) पर बना हुआ है।
उन्होंने बताया कि बाजार में अत्यधिक सट्टेबाजी के कारण अस्थिरता की स्थिति बनी थी, जिसे नियंत्रित करने के लिए कुछ सख्त कदम उठाने पड़े। हालांकि, जैसे ही स्थिति सामान्य होगी, केंद्रीय बैंक अपने सामान्य संचालन पर लौट आएगा।
डिप्टी गवर्नर ने यह भी स्पष्ट किया कि RBI का उद्देश्य एक ऐसा वैश्विक बाजार बनाना है, जहां रुपये से जुड़े किसी भी प्रकार के जोखिम (exposure) के लिए उपयोगकर्ता आसानी से उपलब्ध वित्तीय उत्पादों का उपयोग कर सकें।
उन्होंने कहा कि भविष्य में मुद्रा की मजबूती या कमजोरी बाजार की मांग और आपूर्ति पर निर्भर करेगी। RBI केवल तभी हस्तक्षेप करेगा जब बाजार में अत्यधिक अस्थिरता या अनियंत्रित उतार-चढ़ाव दिखाई देगा।
जियोपॉलिटिकल तनावों के बीच संभावित नए कदमों को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि RBI हमेशा बाजार की स्थिरता और अर्थव्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान उठाए गए त्वरित निर्णयों का भी उदाहरण दिया।
कुल मिलाकर, RBI का यह बयान विदेशी निवेशकों और बाजार प्रतिभागियों को यह आश्वासन देता है कि भारत अपनी मुद्रा व्यवस्था को अधिक उदार और वैश्विक बनाने की दिशा में प्रतिबद्ध है।

