RBI का बड़ा फैसला: रुपए की स्थिरता के लिए NDF बाजार पर लगी पाबंदियों में ढील
RBI का बड़ा फैसला: रुपए की स्थिरता के लिए NDF बाजार पर लगी पाबंदियों में ढील। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 20 अप्रैल को रुपये की अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए ऑफशोर नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड्स (NDF) मार्केट में फॉरेक्स डीलर्स पर लगाई गई कुछ पाबंदियों में ढील देने का फैसला किया है। यह कदम RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने संकेत दिया था कि ये प्रतिबंध स्थायी नहीं होंगे।
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RBI का बड़ा फैसला: रुपए की स्थिरता के लिए NDF बाजार पर लगी पाबंदियों में ढील
क्या बदला RBI ने?
RBI के नए निर्देशों के अनुसार अब अधिकृत डीलर्स को रुपये से जुड़े नॉन-डिलीवरेबल डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स को केवल निवासी या अनिवासी यूजर्स तक सीमित रखने की जरूरत नहीं होगी। इसके साथ ही वे अब इन कॉन्ट्रैक्ट्स को रीबुक करने की अनुमति भी दे सकते हैं। हालांकि, RBI ने स्पष्ट किया है कि रजिस्टर्ड डीलर्स को संबंधित पक्षों के साथ सीधे रुपये आधारित फॉरेन करेंसी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स करने की अनुमति नहीं होगी। यह छूट केवल मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट्स के कैंसिलेशन, रोलओवर और असंबंधित अनिवासी यूजर्स के साथ बैक-टू-बैक ट्रांजेक्शन तक सीमित रहेगी।
पहले क्यों लगाए गए थे प्रतिबंध?
मार्च में RBI ने रुपये में तेज गिरावट और बाजार में बढ़ती सट्टेबाजी को देखते हुए सख्त कदम उठाए थे। उस समय अमेरिका-ईरान तनाव के कारण क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थीं, जिससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ी।RBI के हस्तक्षेप के बाद बैंकों ने करीब 40 अरब डॉलर के सट्टेबाजी सौदों को खत्म किया, जिससे रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर 95.21 से संभलकर मजबूत हुआ।
RBI का रुख
गवर्नर ने पहले ही स्पष्ट किया था कि ये कदम अस्थायी थे और उद्देश्य केवल अत्यधिक अस्थिरता पर नियंत्रण रखना था। RBI ने यह भी दोहराया है कि वह विदेशी मुद्रा बाजार को और गहरा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाने के पक्ष में है। RBI का यह फैसला संकेत देता है कि केंद्रीय बैंक अब धीरे-धीरे बाजार में लचीलापन बढ़ा रहा है, लेकिन साथ ही रुपये की स्थिरता और सट्टेबाजी पर कड़ी निगरानी बनाए रखेगा।

