Global Sanatan: पतंजलि और इंडोनेशिया के एकमात्र हिंदू विश्वविद्यालय (UHN) के बीच ऐतिहासिक MoU; बाली की धरती पर पुनर्जीवित होगा सनातन और योग का वैभव
हरिद्वार/बाली (इंडोनेशिया): भारतीय संस्कृति, आयुर्वेद और योग के वैश्विक विस्तार को लेकर एक बहुत बड़ी और कड़क अंतरराष्ट्रीय खबर सामने आई है। पतंजलि योगपीठ और इंडोनेशिया के एकमात्र हिंदू विश्वविद्यालय, यूनिवर्सिटी हिंदू नेगरी {Universitas Hindu Negeri (UHN)} के बीच इंडोनेशिया में एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए गए हैं।
यह रणनीतिक और सांस्कृतिक साझेदारी न केवल भारत और इंडोनेशिया के बीच शैक्षणिक और अनुसंधान (Research) के नए सेतु का विधिक निर्माण करेगी, बल्कि बाली की ऐतिहासिक धरती पर सनातन धर्म और योग के प्राचीन वैभव को पुनर्जीवित करने में एक कड़ा मील का पत्थर साबित होगी।
🏛️ शैक्षणिक और योग अनुसंधान पर कड़ा विन्यास
पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण की गरिमामयी अगुवाई में हुआ यह अंतरराष्ट्रीय समझौता वैश्विक स्तर पर संस्कृति आधारित विकास (Culture-Based Development) का एक बेहद अनूठा और कड़ा मॉडल पेश करता है:
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आत्मीय स्वागत विन्यास: विश्वविद्यालय प्रबंध समिति की ओर से प्रोफेसर डॉ. गुस्ती न्गुराह सुदियाना (Prof. Dr. Gusti Ngurah Sudiana) और प्रोफेसर माडे पूर्नामा (Prof. Made Purnama) ने आचार्य बालकृष्ण और पतंजलि के वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल का बेहद भावपूर्ण व कड़ा स्वागत किया।
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बड़े स्तर पर कार्य की शुरुआत: इस आत्मीयता पर अपनी गहरी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए आचार्य बालकृष्ण ने घोषणा की कि पतंजलि बहुत जल्द इंडोनेशिया की धरती पर आधुनिक शिक्षा, योग अनुसंधान और सनातन संस्कृति को पुनर्स्थापित करने के लिए बड़े स्तर पर व्यावहारिक कार्य शुरू करने जा रहा है। इस ऐतिहासिक विधिक अवसर पर भारतीय परंपरा के एकमात्र विधायक व बाली के एमएलए (MLA) डॉ. सोमवीर भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। Global Sanatan: पतंजलि और इंडोनेशिया के एकमात्र हिंदू विश्वविद्यालय (UHN) के बीच ऐतिहासिक MoU; बाली की धरती पर पुनर्जीवित होगा सनातन और योग का वैभव
विस अध्यक्ष की भारत यात्रा की इच्छा; शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि में साझा सहयोग
बाली प्रांत के विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) देवा माडे महायज्ञ (Dewa Made Mahayadnya) ने पतंजलि के उच्च गुणवत्तायुक्त स्वदेशी उत्पादों की वैश्विक मंच पर जमकर सराहना की:
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हरिद्वार आने का निमंत्रण: आचार्य श्री के प्रति अपनी सहृदयता प्रकट करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने बहुत जल्द भारत (पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार) आने की कड़क इच्छा व्यक्त की, जो उनके भारत के प्रति गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रेम को दर्शाता है।
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त्रिकोणीय विकास मॉडल: उन्होंने आचार्य बालकृष्ण की मौजूदगी में पतंजलि के साथ मिलकर मुख्य रूप से शिक्षा (Education), स्वास्थ्य (Healthcare) और कृषि (Agriculture) के क्षेत्र में संयुक्त रूप से काम करने की इच्छा जताई। पतंजलि की ओर से भी इसपर पूर्ण विधिक सहमति दी गई है।
बाली के ‘इको-फ्रेंडली मॉडल’ से संवरेगा उत्तराखंड का ‘माला गांव’
अपने इस प्रवास के दौरान आचार्य बालकृष्ण ने बाली द्वीप की स्थानीय संस्कृति, समृद्ध सभ्यता और पर्यावरण अनुकूल विन्यास का बेहद गहन और कड़ा अध्ययन किया:
प्रकृति आधारित विकास: उन्होंने विशेष रूप से यह देखा कि प्रकृति और पर्यावरण को बिना कोई नुकसान पहुंचाए सजावट और आधुनिक विकास कैसे किया जा सकता है। उन्होंने आधिकारिक रूप से कहा कि इसी ‘इको-फ्रेंडली डवलपमेंट मॉडल’ (Eco-Friendly Development Model) की तर्ज पर वे भारत में उत्तराखंड के पौड़ी जनपद अंतर्गत आने वाले धन्वंतरि धाम माला गांव को भी पूरी तरह विकसित करेंगे।
इस ऐतिहासिक अवसर को और जीवंत बनाने के लिए जहां पतंजलि की साध्वी बहनों ने भजनों की सुंदर और आध्यात्मिक प्रस्तुति दी, वहीं इंडोनेशियाई कलाकारों ने अपने पारंपरिक अंदाज में योग और मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर दोनों देशों की साझी सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पटल पर प्रदर्शित किया।
राजकीय अतिथि बने आचार्य बालकृष्ण: युवाओं को मिलेगा कड़ा रोजगार
आपको बता दें कि पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण वर्तमान में इंडोनेशिया के कड़े प्रवास पर हैं। बाली प्रांत के चेयरमैन ने आचार्य को वहां राजकीय अतिथि (State Guest) के रूप में आतिथ्य प्रदान करते हुए उनके लिए विशाल हर्बल उद्यान (Herbal Garden) के भ्रमण की विशेष विधिक व्यवस्था की थी।
भेंटवार्ता के दौरान विधानसभा अध्यक्ष देवा माडे ने कहा:
“पतंजलि योगपीठ का स्वदेशी और संस्कृति आधारित विकास मॉडल आज पूरे विश्व के लिए एक अनुपम उदाहरण है। पतंजलि शिक्षा, चिकित्सा, स्वास्थ्य, कृषि, सूचना एवं प्रौद्योगिकी (IT) और अनुसंधान आदि विविध क्षेत्रों में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। बहुत जल्द इस साझा प्रयास से इंडोनेशिया के युवाओं को योग और आयुर्वेद के क्षेत्र में नवाचार के माध्यम से बड़े स्तर पर रोजगार (Employment) भी सुलभ होगा।”
