Love In The Time Of Peace: खूंखार माओवादी कमांडर ‘गोलू’ और ‘संगीता’ ने थामा एक-दूसरे का हाथ; गोंदिया पुलिस मुख्यालय बना ‘घराती-बाराती’, बंदूक छोड़ रचाई शादी
Love In The Time Of Peace: खूंखार माओवादी कमांडर 'गोलू' और 'संगीता' ने थामा एक-दूसरे का हाथ; गोंदिया पुलिस मुख्यालय बना 'घराती-बाराती', बंदूक छोड़ रचाई शादी
Love In The Time Of Peace: खूंखार माओवादी कमांडर 'गोलू' और 'संगीता' ने थामा एक-दूसरे का हाथ; गोंदिया पुलिस मुख्यालय बना 'घराती-बाराती', बंदूक छोड़ रचाई शादी
Love In The Time Of Peace: खूंखार माओवादी कमांडर ‘गोलू’ और ‘संगीता’ ने थामा एक-दूसरे का हाथ; गोंदिया पुलिस मुख्यालय बना ‘घराती-बाराती’, बंदूक छोड़ रचाई शादी
गोंदिया: कभी हाथों में एके-47 (AK-47) लेकर जंगलों में खौफ का दूसरा नाम रहे दो बड़े माओवादी चेहरों ने अब न केवल समाज की मुख्यधारा में वापसी की है, बल्कि एक-दूसरे का हाथ थामकर जीवन के एक नए और शांतिपूर्ण सफर की शुरुआत कर दी है। वर्षों तक खूनी हिंसा, दहशत और अनिश्चितता के साये में जीने वाले छत्तीसगढ़ के ‘गोलू’ और मध्य प्रदेश की ‘संगीता’ अब हमेशा-हमेशा के लिए विवाह के पवित्र बंधन में बंधकर एक-दूजे के हो गए हैं।
महाराष्ट्र के गोंदिया जिला पुलिस मुख्यालय के ‘प्रेरणा सभागार’ में 31 मई (रविवार) को जब इस अनोखी शादी की शहनाई बजी, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें खुशी से नम हो गईं। इस ऐतिहासिक विवाह में पुलिस अधिकारी सिर्फ सुरक्षाकर्मी की भूमिका में नहीं थे, बल्कि वे खुद आगे बढ़कर इस शादी के ‘घराती और बाराती’ बने नजर आए।
खूंखार कमांडर… अब गृहस्थी के सिकंदर; ऐसा था माओवादी विन्यास
शादी के बंधन में बंधे यह वर-वधू कभी माओवादी संगठन की रीढ़ माने जाते थे और सुरक्षाबलों के लिए बड़ी चुनौती थे:
दूल्हा (पांडू पुसू वड्डे उर्फ गोलू – 37 वर्ष): मूल रूप से छत्तीसगढ़ के पाखंजूर (जिला कांकेर) का निवासी है। यह सीपीआई (माओवादी) संगठन में दर्रेकसा क्षेत्र में डिविजनल कमेटी सदस्य (DVCM) जैसे बड़े और खतरनाक पद पर सक्रिय था।
दुल्हन (सैवंती रायसिंग पंधरे उर्फ संगीता – 36 वर्ष): मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर (ग्राम राशीमेटा) की रहने वाली है। यह दर्रेकसा एरिया कमेटी में एरिया कमेटी सदस्य (ACM) के रूप में कड़क भूमिका निभा रही थी।
एसपी गोरख भामरे का कड़ा संदेश: इस ऐतिहासिक अवसर पर गोंदिया के पुलिस अधीक्षक (SP) गोरख भामरे ने नवदम्पत्ति को आशीर्वाद देते हुए कहा— “यह विवाह केवल एक सामाजिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह भटके हुए लोगों के जीवन में आए महान परिवर्तन, पुनर्मिलन, अटूट विश्वास और एक शांतिपूर्ण भविष्य की नई आशा का उत्सव है।”
खूनी रास्तों से ‘वैवाहिक’ सफर तक का ‘महा-परिवर्तन’
जंगलों की निरर्थक हिंसा और कड़े संघर्षों से तंग आकर दोनों ने 28 नवंबर 2025 को गोंदिया पुलिस के सामने विधिक रूप से आत्मसमर्पण (Sirrender) कर दिया था। जिले की आत्मसमर्पण नीति के तहत अब तक कुल 15 माओवादियों ने सरेंडर किया है, जिन्हें पुलिस कॉलोनी में पूरी सुरक्षा के साथ रखा गया है। समाज में सम्मान से जीने और अपना खुद का परिवार बसाने की चाहत ने ही इन्हें बंदूक छोड़ने के लिए प्रेरित किया।
पुलिस अधीक्षक गोरख भामरे की विशेष अनुमति और प्रभारी पुलिस अधीक्षक अभय डोंगरे के कुशल मार्गदर्शन में इस ‘हृदयस्पर्शी’ विवाह के पूरे विन्यास को विधि-विधान से संपन्न कराया गया।