Jojila Sunag: इंजीनियरिंग का अजूबा- 9 जून को होगा ‘जोजिला सुरंग’ का महा-ब्रेकथ्रू; कश्मीर से लद्दाख का सफर साढ़े 3 घंटे से घटकर रह जाएगा सिर्फ 15 मिनट

Jojila Sunag: इंजीनियरिंग का अजूबा- 9 जून को होगा 'जोजिला सुरंग' का महा-ब्रेकथ्रू; कश्मीर से लद्दाख का सफर साढ़े 3 घंटे से घटकर रह जाएगा सिर्फ 15 मिनट

Jojila Sunag: इंजीनियरिंग का अजूबा- 9 जून को होगा ‘जोजिला सुरंग’ का महा-ब्रेकथ्रू; कश्मीर से लद्दाख का सफर साढ़े 3 घंटे से घटकर रह जाएगा सिर्फ 15 मिनट

श्रीनगर/लेह: हिमालय की गगनचुंबी और दुर्गम चोटियों के बीच सफर करने वाले देशवासियों और भारतीय सेना के लिए एक ऐतिहासिक पल बेहद करीब आ गया है। कश्मीर और लद्दाख के बीच बन रही सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘जोजिला सुरंग’ (Zojila Tunnel) आगामी 9 जून को अपने निर्माण के सबसे निर्णायक और महत्वपूर्ण चरण में पहुंचने वाली है।

इस ऐतिहासिक दिन सुरंग के दोनों छोरों (सोनमर्ग और द्रास) से कड़क खुदाई कर रही इंजीनियरिंग टीमें आपस में मिल जाएंगी, जिसे तकनीकी भाषा में ‘ब्रेकथ्रू’ (Breakthrough) कहा जाता है। इस ऐतिहासिक गौरवमयी पल का गवाह बनने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के भी समारोह में शामिल होने की प्रबल संभावना है।

सिर्फ 10 मीटर की खुदाई बाकी; ₹4,600 करोड़ से रचा जा रहा है विश्व रिकॉर्ड

समुद्र तल से अत्यधिक ऊंचाई पर बनाई जा रही इस सुरंग का विन्यास आधुनिक इंजीनियरिंग की एक बेजोड़ मिसाल है:

माइनस डिग्री तापमान में खत्म होगा 6 महीने का कड़ा ब्लैकआउट

वर्तमान में भारी बर्फबारी, भूस्खलन और हिमस्खलन (Avalanches) के कारण जोजिला दर्रा सर्दियों के मौसम में पूरी तरह बंद हो जाता है। इसके कारण लद्दाख का संपर्क देश के बाकी हिस्सों से लगभग 5 से 6 महीने तक विच्छिन्न (कट) रहता है।

12 महीने खुली रहेगी राह: जोजिला सुरंग के विधिक रूप से शुरू होते ही यह कड़ा ब्लैकआउट हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। अब कश्मीर से लद्दाख तक साल के पूरे 12 महीने और 365 दिन वाहनों की निर्बाध आवाजाही संभव हो सकेगी।

 साढ़े 3 घंटे का जानलेवा सफर… अब सिर्फ 15 मिनट का विन्यास

यह प्रोजेक्ट दुर्गम पहाड़ियों के बीच यात्रा के समय को इस तरह कड़ा और संक्षिप्त कर देगा:

 भारतीय सेना और लद्दाख के पर्यटन को मिलेगी अदम्य ताकत

जोजिला सुरंग का पूरा होना भारत के लिए रणनीतिक और सामाजिक दोनों मोर्चों पर एक ‘गेम-चेंजर’ विन्यास साबित होने वाला है:

  1. सेना की रणनीतिक मजबूती: चीन और पाकिस्तान की सीमाओं के करीब होने के कारण इस टनल का सबसे बड़ा विधिक लाभ भारतीय सेना (Indian Army) को मिलेगा। हर मौसम में लद्दाख सीमा तक भारी सैन्य उपकरण, रसद और सैनिकों की त्वरित आवाजाही बेहद आसान हो जाएगी।

  2. स्थानीय लोगों को संजीवनी: कड़क सर्दियों के दिनों में भी स्थानीय आबादी को राशन, सब्जियां, दवाइयां और ईंधन की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

  3. पर्यटन और रोजगार का महा-कनेक्ट: कनेक्टिविटी 12 महीने रहने से कारगिल, लेह-लद्दाख और सोनमर्ग जैसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थलों पर सालभर सैलानियों का तांता लगा रहेगा, जिससे स्थानीय होटल, परिवहन और व्यापार जगत को कड़ा आर्थिक लाभ और रोजगार मिलेगा।

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