Mumbai Real Estate Breaking: महाराष्ट्र सरकार ने 1,601 करोड़ रुपये में खरीदी ऐतिहासिक ‘एयर इंडिया बिल्डिंग’; LIC और JNPA को पछाड़कर पूरी की मेगा डील, खत्म होगी दफ्तरों की कमी
Mumbai Real Estate Breaking: महाराष्ट्र सरकार ने 1,601 करोड़ रुपये में खरीदी ऐतिहासिक 'एयर इंडिया बिल्डिंग'; LIC और JNPA को पछाड़कर पूरी की मेगा डील, खत्म होगी दफ्तरों की कमी
Mumbai Real Estate Breaking: महाराष्ट्र सरकार ने 1,601 करोड़ रुपये में खरीदी ऐतिहासिक ‘एयर इंडिया बिल्डिंग’; LIC और JNPA को पछाड़कर पूरी की मेगा डील, खत्म होगी दफ्तरों की कमी
मुंबई: मुंबई के नरीमन पॉइंट (Nariman Point) की स्काईलाइन की पहचान और देश की ऐतिहासिक इमारतों में शुमार ‘एयर इंडिया बिल्डिंग’ (Air India Building) अब आधिकारिक तौर पर महाराष्ट्र सरकार के प्रशासनिक विन्यास का हिस्सा बन चुकी है। राज्य सरकार ने एयर इंडिया एसेट्स होल्डिंग लिमिटेड (AIAHL) से इस प्रतिष्ठित 23 मंजिला इमारत को 1,601 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि में खरीद लिया है।
इस खरीद के साथ ही राज्य सरकार को अपने प्रशासनिक मुख्यालय ‘मंत्रालय’ (Mantralaya) के ठीक पास लगभग 46,470 वर्ग मीटर (करीब 5 लाख वर्ग फुट) का विशाल और कड़ा कॉर्पोरेट ऑफिस स्पेस मिल गया है।
क्यों पड़ी जरूरत? 2012 के ‘मंत्रालय अग्निकांड’ से जुड़ा है कनेक्शन
राज्य सरकार के इस बड़े कदम से मुंबई में सालों से चली आ रही दफ्तरों की जगह (Space Crunch) की किल्लत पूरी तरह खत्म हो जाएगी:
किराए के बोझ से मुक्ति: साल 2012 में मुंबई के ‘मंत्रालय’ परिसर में लगी भीषण आग के बाद कई सरकारी विभागों को वहां से विस्थापित करना पड़ा था। तब से कई अहम दफ्तर मुंबई के अलग-अलग कोनों से किराए की इमारतों में चल रहे थे, जिनका सरकार करोड़ों रुपये किराया भर रही थी।
बेहतर प्रशासनिक तालमेल: केंद्र सरकार ने साल 2024 में इस बिक्री को हरी झंडी दी थी, जिसके बाद नवंबर 2025 में महाराष्ट्र कैबिनेट ने इस पर विधिक मुहर लगाई। अब सभी बिखरे हुए विभाग मंत्रालय के करीब एक ही छत के नीचे आ जाएंगे।
LIC और JNPA रेस से बाहर; ऐसे तय हुआ 1,601 करोड़ का विन्यास
साल 2018 में जब एयर इंडिया ने अपना मुख्यालय नई दिल्ली शिफ्ट किया, तब ‘एसेट मोनेटाइजेशन’ के तहत इस बिल्डिंग को बेचने का फैसला हुआ था। शुरुआत में एयर इंडिया ने इसके लिए 2,000 करोड़ रुपये मांगे थे। इस रेस में देश के कई बड़े दिग्गज शामिल थे:
जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA): 1,375 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया।
भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC): 1,200 करोड़ रुपये की बोली लगाई।
महाराष्ट्र सरकार: पहले 1,400 करोड़ का प्रस्ताव था, जिसे बाद में बढ़ाकर 1,601 करोड़ रुपये किया गया। साथ ही सरकार ने लीज जमीन से जुड़ी करीब 300 करोड़ रुपये की बकाया राशि और ब्याज को माफ करने पर विधिक सहमति जताई, जिसके बाद यह डील फाइनल हुई।
2022 में फडणवीस की पहल रंग लाई; PWD को मिला 1 साल का टारगेट
इस सौदे को अमलीजामा पहनाने में राजनीतिक विन्यास भी बेहद कड़ा रहा। साल 2022 में महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे सरकार के आने के बाद, तत्कालीन उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तत्कालीन केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात कर इस इमारत को महाराष्ट्र सरकार को ही सौंपने का विशेष विधिक अनुरोध किया था।
आगे का प्लान (Next Step): लोक निर्माण विभाग (PWD) को इस बिल्डिंग के अंदरूनी हिस्से (Interiors) के रेनोवेशन और मरम्मत की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पीडब्ल्यूडी को कड़ा निर्देश दिया गया है कि एक साल के भीतर पूरी बिल्डिंग को पूरी तरह चमकाकर सरकारी दफ्तरों की शिफ्टिंग के लिए तैयार किया जाए।