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Raksha Bandhan Story 2020: सदियों पुराना है रक्षाबंधन का इतिहास, महाभारत में भी मिलता है इसका उल्लेख

rakhithali

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रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते का प्रसिद्ध त्योहार है, जिसे राखी भी कहते हैं। रक्षाबंधन में रक्षा का मतलब होता है सुरक्षा और बंधन का मतलब ‘बाध्य’ होता है।

रक्षाबंधन में राखी या रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्त्व है। राखी रंगीन कलावे, रेशमी धागे, सोने या चांदी जैसी महंगी वस्तु तक की हो सकती है।

इस दिन बहनें अपने भाईयों को राखी बांधकर भगवान से उनकी तरक्की के लिए प्रार्थना भी करती हैं।

वैसे तो सामान्य तौर पर राखी बहनें अपने भाई को ही बांधती हैं, लेकिन इसके अलावा भी राखी ब्राह्मणों, गुरुओं और परिवार में छोटी लड़कियों द्वारा सम्मानित सम्बंधियों (जैसे बेटी द्वारा पिता) को भी बांधी जाती है। आइए जानते हैं रक्षाबंधन का इतिहास क्या है, इसे मनाने की शुरुआत कब हुई थी।

 

सदियों पुराना है रक्षाबंधन का इतिहास
रक्षाबंधन की शुरुआत कब हुई थी, इसका कोई निश्चित इतिहास नहीं मिलता, लेकिन माना जाता है कि यह सदियों पुराना त्योहार है।

भविष्यपुराण के अनुसार, एक बार देव और दानवों के बीच युद्ध हो रहा था, तब दानव देवों पर हावी हो गए थे।

इससे घबराकर इंद्रदेव गुरु बृहस्पति के पास चले गए और उन्हें अपनी व्यथा सुनाई। ये बातें इन्द्राणी भी सुन रही थीं।

उन्होंने रेशम के धागे से निर्मित रक्षासूत्र को भगवान इन्द्र के हाथों पर बांध दिया। संयोग से उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि थी।

महाभारत में भी मिलता रक्षाबंधन का उल्लेख
कहते हैं कि महाभारत में भी रक्षाबंधन का उल्लेख मिलता है।

दरअसल, जब ज्येष्ठ पांडव युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से पूछा कि मैं सभी संकटों को कैसे पार कर सकता हूं, तब भगवान कृष्ण ने उनकी और उनकी सेना की रक्षा के लिए राखी का त्योहार मनाने की सलाह दी थी।

उनका कहना था कि राखी के रेशमी धागे में वह शक्ति है, जिससे आप हर विपत्ति से मुक्ति पा सकते हैं।

रानी कर्णावती ने हुमायूं को भेजी थी राखी
मध्यकालीन युग में भी राखी बांधने का प्रचलन था। कहते हैं कि एक बार राजपूत और गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह के बीच युद्ध चल रहा था।

तब चित्तौड़ के राजा की विधवा रानी कर्णावती ने अपनी प्रजा की सुरक्षा के लिए हुमायूं को राखी भेजी थी।

तब हुमायूं ने चित्तौड़ और रानी कर्णावती की रक्षा की थी और उन्हें अपनी बहन का दर्जा दिया था।

 

स्वतंत्रता आंदोलन में रक्षाबंधन की भूमिका
स्वतंत्रता संग्राम में भी रक्षाबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

कहते हैं कि रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने बंग-भंग का विरोध करते समय रक्षाबंधन को बंगाल निवासियों के पारस्परिक भाईचारे और एकता का प्रतीक बनाकर इस त्योहार का राजनीतिक उपयोग शुरू किया था।

अब तो पेड़ों को भी बांधी जाती है राखी
अब तो प्रकृति के संरक्षण के लिए पेड़-पौधों को भी राखी बांधने की परंपरा शुरू हो गई है।

लोग पेड़-पौधों को राखी बांधकर उनकी रक्षा का वचन देते हैं।

सिर्फ यही नहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पुरुष सदस्य भी परस्पर भाईचारे के लिए एक दूसरे को भगवा रंग की राखी बांधते हैं।

नेपाल में है अलग परंपरा
नेपाल के पहाड़ी इलाकों में ब्राह्मण और क्षेत्रीय समुदाय में राखी गुरू और भागिनेय के हाथ से बांधी जाती है, लेकिन दक्षिण सीमा में रहने वाले भारतीय मूल के नेपाली भारत की तरह ही अपनी बहन से राखी बंधवाते हैं।

 

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