उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला का 30 साल पुराना रिश्ता खत्म: आपसी सहमति से तलाक पर लगी मुहर; SC पहुंचे कपिल सिब्बल
उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला के बीच तलाक पर बनी सहमति; सुप्रीम कोर्ट में आर्टिकल-142 के तहत दी गई अर्जी
उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला का 30 साल पुराना रिश्ता खत्म: आपसी सहमति से तलाक पर लगी मुहर; SC पहुंचे कपिल सिब्बल
उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला का 30 साल पुराना रिश्ता खत्म: आपसी सहमति से तलाक पर लगी मुहर; SC पहुंचे कपिल सिब्बल
नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी अलग रह रही पत्नी पायल अब्दुल्ला के बीच आखिरकार कानूनी रूप से अलग होने (तलाक) पर सहमति बन गई है। उमर अब्दुल्ला की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) को सूचित किया कि दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से ‘आजादी’ चुन ली है और मामले से जुड़ी सभी शर्तें तय हो चुकी हैं।
दोनों पक्षों ने संविधान के अनुच्छेद 142 (Article 142) के तहत सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त याचिका दाखिल कर तलाक को मंजूरी देने की गुहार लगाई है।
2009 से अलग रह रहे थे दोनों, 1994 में हुई थी शादी
शादी और परिवार: उमर अब्दुल्ला और पायल की शादी वर्ष 1994 में हुई थी और दोनों के दो बेटे हैं।
तलाक की वजह: उमर अब्दुल्ला के अनुसार, वे वर्ष 2009 से ही एक-दूसरे से अलग रह रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि उनकी शादी पूरी तरह से टूट चुकी है और अब इसे किसी भी तरह से ठीक किया जाना संभव नहीं है।
मुकदमे वापस लेने पर सहमति: कपिल सिब्बल ने पीठ को बताया कि समझौते के तहत दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ दर्ज कराए गए सभी मामलों और याचिकाओं को वापस लेने पर सहमत हो गए हैं।
फैमिली कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक: जानिए कानूनी सफर
फैमिली कोर्ट (2016): अगस्त 2016 में दिल्ली की फैमिली कोर्ट ने उमर अब्दुल्ला की तलाक की अर्जी खारिज कर दी थी।
दिल्ली हाई कोर्ट (2016-2023): फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सितंबर 2016 में हाई कोर्ट का रुख किया गया। हालांकि, हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि उमर अब्दुल्ला अपनी पत्नी पर ‘क्रूरता’ के आरोपों को साबित करने में असमर्थ रहे।
सुप्रीम कोर्ट (2024-2026): दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। 22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में आपसी सहमति की अर्जी दाखिल की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस नरसिम्हा की पीठ ने कहा कि न्यायालय दोनों पक्षों के समझौते और शर्तों की जानकारी को अपने अंतिम आदेश का हिस्सा बनाएगा। कोर्ट ने आश्वासन दिया कि वे दोनों पक्षों की सहमति के अनुसार जल्द ही इस मामले का निपटारा करेंगे।