नगर निगम मुख्यालय की चमक-दमक पर उठे सवाल; ₹73 करोड़ की अत्याधुनिक बिल्डिंग में बिजली गुल होते ही 20 मिनट तक लिफ्ट में फंसी रही महिला कर्मचारी

नगर निगम मुख्यालय की चमक-दमक पर उठे सवाल; ₹73 करोड़ की अत्याधुनिक बिल्डिंग में बिजली गुल होते ही 20 मिनट तक लिफ्ट में फंसी रही महिला कर्मचारी

राजधानी: करोड़ों रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार किए गए नगर निगम के नए और अत्याधुनिक मुख्यालय की भव्यता बुधवार को एक बेहद गंभीर हादसे के बाद सीधे सवालों के घेरे में आ गई है। लिंक रोड नंबर-2 पर स्थित, करीब 73 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस नई और हाई-टेक बिल्डिंग में एक महिला कर्मचारी करीब 20 मिनट तक लिफ्ट के भीतर जिंदगी और मौत के बीच फंसी रहीं।

हैरानी और घोर लापरवाही की बात यह रही कि आधुनिक सुख-सुविधाओं और फुल बैकअप से लैस बताई जा रही इस नई इमारत की लिफ्ट में बिजली गुल होते ही न तो ऑटो रेस्क्यू सिस्टम (ARS) सक्रिय मिला और न ही कोई ऐसा आपातकालीन बैकअप इंतजाम दिखा, जो बिजली जाते ही लिफ्ट को नजदीकी फ्लोर पर लाकर यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल सके।नगर निगम मुख्यालय की चमक-दमक पर उठे सवाल; ₹73 करोड़ की अत्याधुनिक बिल्डिंग में बिजली गुल होते ही 20 मिनट तक लिफ्ट में फंसी रही महिला कर्मचारी

 ऊपरी मंजिल पर जाते समय बीच रास्ते में थम गई सांसें

प्रत्यक्षदर्शियों और मुख्यालय में मौजूद कर्मचारियों से मिली विधिक जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना बुधवार को उस समय घटित हुई जब पीड़ित महिला कर्मचारी ग्राउंड फ्लोर से अपनी ड्यूटी के लिए ऊपरी मंजिल पर जाने हेतु लिफ्ट में सवार हुई थीं।नगर निगम मुख्यालय की चमक-दमक पर उठे सवाल; ₹73 करोड़ की अत्याधुनिक बिल्डिंग में बिजली गुल होते ही 20 मिनट तक लिफ्ट में फंसी रही महिला कर्मचारी

 ‘स्मार्ट’ दावों की खुली पोल; क्यों फेल हुआ रेस्क्यू सिस्टम?

इस घटना ने नगर निगम प्रशासन के उन कड़े दावों पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है, जिसमें इस 73 करोड़ की बिल्डिंग को पूरी तरह सुरक्षित और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बताया जा रहा था:

  1. ऑटो रेस्क्यू सिस्टम का न होना: आधुनिक लिफ्ट्स में ‘ऑटो रेस्क्यू डिवाइस’ (ARD) लगी होती है, जो बिजली कटने पर लिफ्ट को तुरंत पास के फ्लोर पर ले जाकर उसका दरवाजा खोल देती है। इस वीआईपी बिल्डिंग में यह सिस्टम पूरी तरह निष्क्रिय पाया गया।

  2. मेंटेनेंस और सुरक्षा ऑडिट पर सवाल: करोड़ों रुपये फूंकने के बाद भी अगर कर्मचारियों की जान दांव पर लग रही है, तो इस प्रोजेक्ट के तकनीकी विन्यास और मेंटेनेंस कांट्रैक्ट पर कड़े विधिक सवाल उठना लाजिमी है।

 

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