Ordinance Factory Privatization: निगमीकरण के रास्ते ऑर्डिनेंस फैक्ट्रीयों का निजीकरण, रिपोर्ट

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Ordinance Factory Privatization: निगमीकरण के रास्ते ऑर्डिनेंस फैक्ट्रीयों का निजीकरण जैसा कि आप सब जानते हैं आपदा में अवसर के नाम पर 16 मई 2021 को देश की 41 ऑर्डिनेंस फैक्ट्री को निगमीकरण की घोषणा करके 1 अक्टूबर 2021 को 41 ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड को खत्म कर 41 ऑर्डिनेंस फैक्ट्री को 7 DPSU में बदल दिया गया।

 

डीपीसीयू मर्जर से रक्षा संपदा शेयर बाजार को सौपी जायेगी ?

चीफ लेबर कमिश्नर के समक्ष त्रिपक्षीय समझौते में रक्षा मंत्रालय द्वारा यह स्पष्ट रूप से कहा गया था कि ऑर्डनेंस फैक्ट्रीयों के निगमीकरण का कोई प्रस्ताव नहीं है, फिर भी समझौते को दरकिनार कर देश की बहुमूल्य राष्ट्रीय संपदा को निगमिकरण करके धन्नासेठों को पिछले दरवाजे का से सौंपने का षड्यंत्र रचा जा चुका है।

 

ऑर्डनेंस फैक्ट्री के रिस्ट्रक्चरिंग

ऑर्डनेंस फैक्ट्री के रिस्ट्रक्चरिंग के लिए प्राइस वाटर कुपर नाम की कंपनी को करोड़ों रुपए कंसल्टेंसी फीस देकर 7 अव्यवहारिक कंपनियों का गठन किया गया। यह वही प्राइस वाटर कुपर कंपनी है जिसके देश की 9 बर्न कंपनियों को बिकवा दिया या बंद करवा दिया ।

 

सरकारी रक्षा क्षेत्र समाप्त

 

देश के धन्नासेठों के साथ षड्यंत्र करके देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करके ऐसी ऐसी नीतियां बनाई जा रही है जिससे देश का सरकारी रक्षा क्षेत्र समाप्त किया जा सके। इसमें यह कहना जरूरी है बड़े-बड़े अधिकारी रक्षा क्षेत्र का काम प्राइवेट में जाए इसलिए धन्नासेठों की दलाली में लगे हुए है।

 

डीपीएसयू के मर्जर के लिए एक कमेटी का गठन

 

29 अगस्त को रक्षा मंत्रालय द्वारा एक आदेश के माध्यम से डीपीएसयू के मर्जर के लिए एक कमेटी का गठन किया गया, जिसमें विभिन्न ऑर्डनेंस फैक्ट्रीयो की कंपनियां आपस में मर्ज की जाएंगी। फेडरेशन शुरू से ही निगमीकरण की पुरजोर खिलाफत करता रहा है, फेडरेशन द्वारा जब यह कहा गया था ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड को भंग ना किया जाए परंतु सरकार द्वारा बोर्ड को 7 टुकड़ों में बांट दिया गया एक साल के अंदर 41 ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियां में से ज्यादातर बर्बादी की कगार पर जा पहुंची है ।

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रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर चार टुकड़ों में बांटा जा रहा

 

सात टुकड़ों में बांटने के बाद फिर से रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर चार टुकड़ों में बांटा जा रहा है ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि अधिकतर कंपनियों के पास कर्मचारियों को देने वेतन देने की लायक भी पैसा नहीं है। सरकार द्वारा सेना को प्राइवेट कंपनियों से सीधे खरीदने की छूट दे दी गई है जिससे ऑर्डनेंस फैक्ट्री के काम में असर पड़ा यह देश की सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ है।

 

41 ऑर्डिनेंस फैक्ट्रीयो वजूद खतरे में

 

41 ऑर्डिनेंस फैक्ट्रीयो का वजूद खतरे में पड़ गया है। 223 साल पहले 1 ऑर्डनेंस फैक्ट्री से 41 ऑर्डिनेंस फैक्ट्रीयों तक देश की जनता का अरबों खरबों रुपया लगा हुआ है , जिसको सरकार बंद करके ओने पोने दाम पर धन्नासेठों के हाथों में देने की तैयारी कर चुकी है। फेडरेशन ने हमेशा ही 7 डीपीएसयू के गठन को अव्यवहारिक बताया और आज डीपीएसयू के मर्जर से यह बात सच साबित हो रही है।

 

डीसीएसयू सरकार की 100% वाली कंपनी

संसद में रक्षा मंत्री ने देश के सामने यह कहा था कि साथ डीसीएसयू सरकार की 100% वाली कंपनी रहेगी जबकि मर्जर के दौरान BEL जिसमें सरकार का 55% हिस्सा है तथा OPTEL इंडिया का जिसमें सरकार का 100% हिस्सा है मर्जर किस तरह से किया जाएगा। यह ऑर्डनेंस फैक्ट्री को शेयर बाजार में लिस्ट करने की शुरुआत है। निगमीकरण करने के पश्चात ओवरहेड में बढ़ोतरी हुई , कच्चा माल खरीदने में विलंब तथा मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति में जानबूझ कर रुकावटें डाली जा रही है ।

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ब्यूरोक्रेट देश की बहुमूल्य रक्षा संपदा को बेचने करने का षड्यंत्र रच चुके

ऑर्डनेंस फैक्ट्री का निजीकरण करके दिल्ली में बैठे नेता तथा ब्यूरोक्रेट देश की बहुमूल्य रक्षा संपदा को बेचने करने का षड्यंत्र रच चुके हैं । निगमीकरण होने के पश्चात किसी भी अधिकारी के वेतन में कोई फर्क नहीं पड़ा जबकि कामगार का वेतन घट गया पीस वर्क, ओवर टाइम बंद कर दिया गया और हजारों कर्मचारियों के पे पॉकेट में 40% की कटौती की गई । अनुकंपा नियुक्तियां सहित सारी सुविधाएं छीन ली गई है । बिना सोचे समझे बनाई गई नीतियों से आम जनता को नुकसान पहुंचाया जा रहा है AIDEF एक बार फिर सरकार को आगाह करता है चाहे 7 टुकड़े या 4 टुकड़े किए जाएं निगमीकरण के चलते ऑर्डनेंस फैक्ट्री का अस्तित्व एक न एक दिन समाप्त हो जाएगा।