नूरजहाँ खान राउर को हिंदी विषय में मिली पीएचडी की उपाधि,शोध कार्य में गुरुजनों के मार्गदर्शन और माता-पिता सहित परिवार के सहयोग को बताया सफलता का आधार

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नूरजहाँ खान राउर को हिंदी विषय में मिली पीएचडी की उपाधि,शोध कार्य में गुरुजनों के मार्गदर्शन और माता-पिता सहित परिवार के सहयोग को बताया सफलता का आधा

सिवनी। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर के कला संकाय के अंतर्गत हिंदी विषय में श्रीमती नूरजहाँ खान राउर को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई है। उन्होंने ‘हिंदी की कहानियों में चित्रित पहाड़ी जीवन के यथार्थ का अनुशीलन’ विषय पर शोध कार्य पूर्ण किया। 16 अक्टूबर 2026 को उनकी मौखिक परीक्षा (वाइवा) सफलतापूर्वक संपन्न हुई, जिसके बाद विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई।

उनका शोध कार्य शोध निर्देशिका प्रो. डॉ. माधुरी गर्ग, शासकीय तिलक स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कटनी तथा सह-शोध निर्देशक डॉ. महेंद्र कुशवाहा के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

इस उपलब्धि पर श्रीमती राउर ने विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजेश वर्मा एवं कुलसचिव प्रो. डॉ. सुरेंद्र सिंह के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से मिले अनुकूल शैक्षणिक वातावरण और सुविधाओं ने शोध कार्य को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अपनी शोध निर्देशिका प्रो. डॉ. माधुरी गर्ग के प्रति विशेष कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके निरंतर मार्गदर्शन, विद्वत्ता, प्रोत्साहन और स्नेहपूर्ण सहयोग के बिना यह उपलब्धि हासिल करना संभव नहीं था।

शोध यात्रा के दौरान अकादमिक सहयोग देने वाले हिंदी एवं भाषाविज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. धीरेन्द्र पाठक, अध्यक्ष अध्ययन मंडल प्रो. अरुण शुक्ल, डॉ. विपुला सिंह, डॉ. आशीष पांडे एवं डॉ. सचिन कोस्टा के प्रति भी उन्होंने आभार जताया।

श्रीमती राउर ने अपनी सफलता का श्रेय माता श्रीमती आयशा खान, पिता श्री हारून रशीद खान तथा सास-ससुर के आशीर्वाद और संस्कारों को देते हुए कहा कि परिवार के बड़ों का विश्वास और शुभकामनाएं हमेशा उनकी प्रेरणा बने रहे। उन्होंने पति के.सी. बापू राउर तथा दोनों पुत्रों दिव्य राउर और दर्श राउर के सहयोग को भी अपनी सफलता की महत्वपूर्ण कड़ी बताया। उनके अनुसार, पति और बच्चों के स्नेह, धैर्य, विश्वास एवं निरंतर प्रोत्साहन ने शोध कार्य के दौरान आने वाली चुनौतियों का सामना करने की शक्ति दी।

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उन्होंने अपने इष्ट-मित्रों, सहयोगियों और पुस्तकालय कर्मियों के प्रति भी आभार व्यक्त किया। इस उपलब्धि पर पीजी कॉलेज सिवनी के प्राचार्य डॉ. रविशंकर नाग तथा शासकीय महाविद्यालय बरघाट के प्राचार्य डॉ. बी.एल. इनवाती ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

नूरजहाँ खान राउर की यह उपलब्धि वर्षों के परिश्रम, लगन, शैक्षणिक प्रतिबद्धता और गुरुजनों एवं परिवार के सहयोग का परिणाम है। उनकी इस सफलता से परिवारजनों, शुभचिंतकों और शैक्षणिक जगत में हर्ष का माहौल है।