कटनी। स्लीमनाबादस्लीमनाबाद रेलवे स्टेशन मॉक ड्रिल के दौरान गुरुवार दोपहर अचानक ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने पूरे रेलवे तंत्र को सक्रिय कर दिया। टावर वैगन के पटरी से उतरने और कई रेलकर्मियों के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना मिलते ही इमरजेंसी सायरन गूंज उठा। देखते ही देखते कटनी, कछपुरा और जबलपुर से दुर्घटना राहत ट्रेन (ART) और मेडिकल वैन घटनास्थल की ओर रवाना हो गईं। हालांकि, कुछ ही देर बाद स्पष्ट हुआ कि यह कोई वास्तविक रेल हादसा नहीं, बल्कि रेलवे की आपातकालीन तैयारियों को परखने के लिए आयोजित एक व्यापक मॉक ड्रिल थी।

स्लीमनाबाद रेलवे स्टेशन मॉक ड्रिल में अचानक गूंजा इमरजेंसी सायरन
गुरुवार दोपहर करीब 1:10 बजे स्लीमनाबाद रेलवे स्टेशन पर टावर वैगन के डिरेल होने की काल्पनिक सूचना प्रसारित की गई। इसमें कई रेलकर्मियों के गंभीर रूप से घायल होने की स्थिति भी दर्शाई गई थी। सूचना मिलते ही रेलवे के आपातकालीन तंत्र ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी।
रेलवे के निर्धारित आपातकालीन प्रोटोकॉल के तहत कटनी, कछपुरा और जबलपुर से दुर्घटना राहत ट्रेन तथा मेडिकल वैन को रवाना किया गया। इमरजेंसी सायरन की आवाज के बीच राहत एवं बचाव दल तेजी से घटनास्थल की ओर बढ़े। कुछ ही समय में रेलवे के विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी सक्रिय नजर आने लगे।
कटनी, कछपुरा और जबलपुर से पहुंचीं दुर्घटना राहत ट्रेनें
इस अभ्यास में सबसे महत्वपूर्ण पहलू अलग-अलग स्थानों से राहत संसाधनों की तत्काल उपलब्धता और उनके बीच समन्वय रहा। कटनी, कछपुरा और जबलपुर से दुर्घटना राहत ट्रेन (ART) एवं मेडिकल वैन को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।
स्लीमनाबाद रेलवे स्टेशन मॉक ड्रिल के दौरान अधिकारियों ने राहत एवं बचाव व्यवस्था की तैयारियों का जायजा लिया। साथ ही आपातकालीन सूचना मिलने के बाद संबंधित विभागों की सक्रियता, प्रतिक्रिया और आपसी तालमेल को भी परखा गया।
1:10 बजे शुरू हुई कार्रवाई, 1:50 बजे हुआ सफल समापन
दोपहर 1:10 बजे शुरू हुई इस आपातकालीन अभ्यास प्रक्रिया के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। करीब 40 मिनट तक चले इस अभ्यास में रेलवे के विभिन्न विभागों ने अपनी निर्धारित जिम्मेदारियों के अनुसार कार्रवाई की।
इसके बाद दोपहर 1:50 बजे मॉक ड्रिल के सफलतापूर्वक संपन्न होने की घोषणा की गई। इस तरह रेलवे ने एक काल्पनिक दुर्घटना की स्थिति तैयार कर अपनी आपातकालीन प्रतिक्रिया और राहत-बचाव व्यवस्था का परीक्षण किया।
आखिर क्यों आयोजित की जाती है रेलवे की मॉक ड्रिल?
रेलवे में किसी भी बड़ी दुर्घटना या आपातकालीन स्थिति के दौरान शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसी परिस्थितियों में दुर्घटना राहत ट्रेन, मेडिकल टीम, तकनीकी कर्मचारियों और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय होना जरूरी है।
स्लीमनाबाद रेलवे स्टेशन मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य भी रेलवे की इसी आपदा प्रबंधन क्षमता को परखना था। इस तरह के अभ्यास से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि आपातकालीन सूचना मिलने के बाद राहत दल कितनी तेजी से सक्रिय होता है और विभिन्न विभाग किस तरह मिलकर काम करते हैं।
ऐसे अभ्यास रेलवे कर्मचारियों को वास्तविक दुर्घटनाओं से निपटने के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे यात्रियों और रेलकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी व्यवस्थाओं को भी परखा जा सकता है।
कुल मिलाकर, स्लीमनाबाद रेलवे स्टेशन पर गुरुवार को करीब 40 मिनट तक चले इस अभ्यास ने रेलवे की आपातकालीन तैयारियों को परखने का अवसर दिया। टावर वैगन के डिरेल होने की काल्पनिक सूचना से शुरू हुई यह कार्रवाई दोपहर 1:50 बजे सफलतापूर्वक संपन्न हुई। राहत की बात यह रही कि पूरा घटनाक्रम एक मॉक ड्रिल था, कोई वास्तविक रेल दुर्घटना नहीं।











