Nai shiksha niti : छात्रों के पास नौंवी में विषय चुनने का विकल्प, नहीं थोपी जाएगाी कोई भाषा

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बोर्ड परीक्षा को लेकर अभिभावकों और बच्चों का तनाव कम होगा। बोर्ड परीक्षा वार्षिक, सेमेस्टर या मोडयूलर मॉडल पर आधारित होगी।

कक्षा तीन, पांच व आठवीं में भी परीक्षाएं होगीं। 10वीं और 12वीं में होने वाली बोर्ड परीक्षा के लिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि 24 से ज्यादा विषय न हों।

एक बार फेल या अच्छा प्रदर्शन न करने पर छात्र को दो या उससे अधिक बार मौका मिलेगा। एनसीईआरटी अगले वर्ष तक नेशनल कैरिकुलम फ्रेमवर्क 2020 तैयार करेगी। अब तक स्कूली शिक्षा नेशनल कैरिकुलम फ्रेमवर्क 2005 के तहत चल रही है। 2022 की परीक्षा नए पाठ्यक्रम से होगी।
ज्ञान और रोजगार आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बोर्ड की तैयारी 9वीं से 12वीं कक्षा तक चलेगी।

छात्रों के पास नौंवी में विषय चुनने का विकल्प होगा। इसमें वे विज्ञान, गणित के साथ-साथ फैशन डिजाइनिंग विषय भी चुन सकेंगे।

वहीं, 2021 सत्र के लिए सीबीएसई समेत प्रदेश शिक्षा बोर्ड दसवीं और 12वीं कक्षा की परीक्षा के लिए व्यवहार्य मॉडल तैयार करेंगे।

स्कूल शिक्षा सचिव अनीता करवाल ने कहा कि बोर्ड परीक्षा में बदलाव को लेकर कई सुझाव हैं।

इसमें साल में दो बार परीक्षा करना, दो हिस्सों वस्तुनिष्ठ और व्याख्यात्मक श्रेणियों में विभाजित करना आदि शामिल है।

नहीं थोपी जाएगाी कोई भाषा
पांचवीं और राज्य चाहें तो आठवीं तक की पढ़ाई का माध्यम मातृभाषा, स्थानीय भाषा या क्षेत्रीय भाषा होगी।

स्कूल के सभी स्तरों और उच्च शिक्षा में संस्कृत विकल्प के रूप में चुन सकेंगे। त्रि-भाषा फॉर्मूले में भी यह विकल्प होगा। किसी भी विद्यार्थी पर कोई भाषा नहीं थोपी जाएगी।

देश की अन्य भाषायें और साहित्य भी विकल्प के रूप में उपलब्ध होंगे। विदेशी भाषाओं को भी माध्यमिक शिक्षा स्तर पर विकल्प के रूप में चुना जा सकेगा।

भारतीय संकेत भाषा यानी साइन लैंग्वेज (आईएसएल) को देश भर में मानकीकृत किया जाएगा।

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