MP Govt Scheme: नकली खाद और कालाबाजारी की खबर दो, ₹1000 इनाम पाओ- मध्य प्रदेश सरकार ने शुरू की ‘सूचना दाता प्रोत्साहन योजना’, पहचान रहेगी गुप्त

MP Govt Scheme: नकली खाद और कालाबाजारी की खबर दो, ₹1000 इनाम पाओ- मध्य प्रदेश सरकार ने शुरू की 'सूचना दाता प्रोत्साहन योजना', पहचान रहेगी गुप्त

कटनी: मध्य प्रदेश के किसानों को नकली, मिलावटी खाद और कालाबाजारी के दंश से बचाने के लिए मोहन यादव सरकार ने एक बड़ा और अनोखा दांव खेला है। सूबे के किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा पूरे प्रदेश में “सूचना दाता प्रोत्साहन योजना” का शंखनाद किया गया है। MP Govt Scheme: नकली खाद और कालाबाजारी की खबर दो, ₹1000 इनाम पाओ- मध्य प्रदेश सरकार ने शुरू की ‘सूचना दाता प्रोत्साहन योजना’, पहचान रहेगी गुप्त

इस योजना के तहत अब कोई भी आम नागरिक या किसान अगर खाद (उर्वरक) से जुड़ी किसी भी अवैध गतिविधि की पोल खोलेगा, तो सरकार उसे 1,000 रुपये का नकद इनाम देगी।

1. योजना का मकसद: माफियाओं पर नकेल और किसानों की भागीदारी

सरकार की इस मुहिम का असली मकसद केवल अपराधियों को पकड़ना नहीं, बल्कि व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है:

2. किन गड़बड़ियों की दे सकते हैं सूचना?

यदि आपके आस-पास नीचे दी गई कोई भी अवैध गतिविधि हो रही है, तो आप बेझिझक उसकी शिकायत दर्ज करा सकते हैं:

🤫 पहचान की 100% गोपनीयता: सूचना देने वाले व्यक्ति, किसान या व्यापारी का नाम और पता पूरी तरह से गुप्त (Confidential) रखा जाएगा। बिना आपकी अनुमति के किसी भी स्तर पर आपकी जानकारी उजागर नहीं की जाएगी।

3. कैसे और कहाँ देनी होगी जानकारी? (ये है पूरा प्रोसेस)

4. कैसे होगी जांच और कब मिलेगा ₹1,000 का इनाम?

  1. कलेक्टर की टीम करेगी रेड: सूचना मिलते ही संबंधित जिले के कलेक्टर द्वारा गठित एक विशेष टीम (जिसमें उर्वरक निरीक्षक यानी फर्टिलाइजर इंस्पेक्टर का होना अनिवार्य है) मौके पर जाकर औचक जांच और कार्रवाई करेगी।

  2. सफल कार्रवाई पर मिलेगा रिवॉर्ड: यदि जांच में सूचना सही पाई जाती है और माल की जब्ती या दोष सिद्ध हो जाता है, तो प्रति सफल सूचना पर 1,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि मंजूर की जाएगी।

  3. 30 दिनों में खाते में आएगा पैसा: जिला कलेक्टर द्वारा हरी झंडी मिलते ही यह राशि 30 कार्य दिवसों (Working Days) के भीतर सीधे सूचनादाता के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दी जाएगी।

इस योजना के जिला स्तर पर नोडल अधिकारी उप संचालक (किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग) बनाए गए हैं, जो हर एक शिकायत और उस पर हुई कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड मेंटेन करेंगे।

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