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MP Education News: कक्षा में होगा खुशी का कोना, बच्चे कहेंगे मन की बात

भोपाल। प्रदेश के सरकारी व निजी स्कूल अगस्त से खुल गए हैं। विद्यार्थी भी नियमित रूप से स्कूल पहुंचने लगे हैं। कोरोना के चलते करीब डेढ़ साल से अधिक समय तक घर में रहने के कारण बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ा असर दिख भी रहा है। स्कूलों में शिक्षकों और काउंसलरों ने देखा किबच्चों का व्यवहार आक्रामक हुआ है। वे खुद को अलग-थलग रखना चाहते हैं। उन्हें इससे उबारने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कई गतिविधियां आयोजित कराने की योजना बनाई गई है। इसके लिए स्कूल में केबिननुमा एक कोना (कार्नर) बनाया जाएगा, जिसका नाम खुशी का कोना होगा। यहां बच्चे काउंसलर से खुलकर बात कर सकें। हालांकिप्रदेश के लगभग 30 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में ही अभी काउंसलर हैं। भोपाल संभाग में 350 काउंसलर नियुक्त हैं।

जिन स्कूलों में काउंसलर नहीं हैं, वहां के समाज शास्त्र या मनोविज्ञान के शिक्षक बच्चों की काउंस®लग करेंगे। इस विषय के शिक्षक न होने पर अन्य विषयों के शिक्षक भी यह काम कर सकते हैं। स्कूल प्रबंधन को निजी काउंसलर भी बुलाने का अधिकार दिया गया है। काउंस®लग केवल शनिवार को होगी। इस संबंध में राज्य शिक्षा केंद्र ने जिला शिक्षा अधिकारियों को मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए स्कूलों में गतिविधियां आयोजित करने के आदेश जारी किए हैं। काउंसलर्स की मानें तो स्कूल खुलने पर अभिभावक बड़ी संख्या में बच्चों को काउंस®लग के लिए लेकर पहुंच रहे हैं। कोविड से पहले एक माह में चार से पांच केस बच्चों के आते थे।

अब 10 से 15 केस सामने आ रहे हैं। – कई प्रकार की गतिविधियां आयोजित होंगी बच्चों के इस व्यवहार से उबारने के लिए स्कूलों में पोस्टर बनाना, स्लोगन लिखना और कोविड-19 की परिस्थितियों के दौरान उनके अनुभव पर बातचीत करना या अनुभव लेखन करवाना, कहानी सत्र का आयोजन, नुक्कड़ नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों को नकारात्मकता को दूर करना, बाल संसद का आयोजन, विद्यार्थियों के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा आदि कई प्रकार की गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। साथ ही विभिन्न कला चित्र, संवाद, संगीत, कविता, कहानी, कार्टून आदि के माध्यम से आत्म ®चतन की अभिव्यक्ति करना है।

  • कोरोना की बुरी यादों से उबारा जाएगा स्कूलों में कई गतिविधियां ऐसी कराई जाएंगी, जिसमें बच्चों के साथ उनके अभिभावक भी शामिल होंगे। इसके माध्यम से बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावकों को भी कोरोना की बुरी यादों से निकाला जा सकेगा। – वर्जन इन दिनों स्कूली बच्चों के व्यवहार में बदलाव से जुड़े ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं। एक माह की बात करें तो 10 से 15 ऐसे केस आए हैं। स्कूल शुरू होने से बच्चों का व्यवहार स्पष्ट रूप से सामने आ रहे हैं। वे आब्सेसिव कंपल्सिव डिसआर्डर के शिकार हो रहे हैं।

बच्चों को इससे बाहर लाना जरूरी है, नहीं तो उम्र बढ़ने के साथ उनके लिए मुश्किलें बढ़ जाएंगी। अदिति सक्सेना, मनोविज्ञानी – – कोविड के कारण बच्चे डेढ़ साल तक घर में रहें। इससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ा है। इस कारण स्कूलों में कई गतिविधियां आयोजित कराई जाएंगी, ताकिउन्हें विपरीत परिस्थितियों से बाहर निकाला जा सके। धनराजू एस, संचालक, राज्य शिक्षा केंद्र

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम