मद्रास हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: धर्म बदलकर मुस्लिम बनने वालों को नहीं मिलेगा ‘BCM’ आरक्षण, तमिलनाडु सरकार का आदेश रद्द
मद्रास हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: धर्म बदलकर मुस्लिम बनने वालों को नहीं मिलेगा 'BCM' आरक्षण, तमिलनाडु सरकार का आदेश रद्द
मद्रास हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: धर्म बदलकर मुस्लिम बनने वालों को नहीं मिलेगा ‘BCM’ आरक्षण, तमिलनाडु सरकार का आदेश रद्द
चेन्नई: मद्रास हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में तमिलनाडु सरकार के उस आदेश (GO) को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया है, जिसमें धर्म परिवर्तन कर इस्लाम अपनाने वाले लोगों को पिछड़ा वर्ग मुस्लिम (BCM) श्रेणी के तहत आरक्षण देने की बात कही गई थी।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति केवल इस्लाम अपनाने के आधार पर राज्य के अधिसूचित मुस्लिम पिछड़े समुदायों का हिस्सा नहीं बन सकता।
‘वो सिर्फ एक मुस्लिम है और बस यही बात है’
मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की बेंच ने सख्त और स्पष्ट टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा:
“हमारा मानना है कि इस्लाम अपनाने वाला व्यक्ति ‘पिछड़ा वर्ग मुस्लिम’ (BCM) का दर्जा नहीं मांग सकता। वह सिर्फ एक मुस्लिम है और बस यही बात है। राज्य की यह धारणा कानूनी और वैचारिक रूप से पूरी तरह गलत थी।”
क्या था तमिलनाडु सरकार का 2024 का आदेश?
तमिलनाडु सरकार ने 9 मार्च 2024 को एक शासनादेश जारी किया था। इसके तहत:
यदि पिछड़ा वर्ग (BC), अति पिछड़ा वर्ग (MBC), डीएनसी (DNC) या अनुसूचित जाति (SC) का कोई व्यक्ति धर्म बदलकर इस्लाम अपनाता है, तो उसे ‘पिछड़ा वर्ग मुस्लिम’ (BCM) मानकर आरक्षण का लाभ दिया जाएगा।
ऐसे व्यक्तियों को राज्य के 7 विशेष मुस्लिम समुदायों में से किसी एक का सदस्य बताते हुए ‘कम्युनिटी सर्टिफिकेट’ (जाति प्रमाण पत्र) जारी करने की भी अनुमति दी गई थी।
कोर्ट ने क्यों खारिज किया सरकार का तर्क?
तमिलनाडु में साल 2008 के एक सरकारी आदेश के तहत ‘पिछड़ा वर्ग मुस्लिम’ (BCM) श्रेणी में केवल 7 विशेष समुदायों को ही शामिल किया गया है। ये समुदाय हैं:
अंसार
दक्कनी मुस्लिम
दुबेकुला
लब्बाई (राउथर और मरकयार सहित)
मपिल्ला
शेख
सैयद
हाई कोर्ट ने साफ किया कि बाहर से धर्म परिवर्तन कर इस्लाम अपनाने वाला व्यक्ति सीधे इन पारंपरिक और अधिसूचित 7 समुदायों में से किसी का सदस्य नहीं बन सकता। इसलिए उन्हें इस कैटेगरी के तहत आरक्षण का लाभ देना पूरी तरह गैर-कानूनी है।