कंधार हाइजैक की असली कहानी: आतंकियों की मांगें और भारत की मजबूरी की पूरी कहानी, जानिए स्टेप बाई स्टेप
कंधार हाइजैक की असली कहानी: आतंकियों की मांगें और भारत की मजबूरी
कंधार हाइजैक की असली कहानी: आतंकियों की मांगें और भारत की मजबूरी । नेटफ्लिक्स की ‘आईसी 814: द कंधार हाईजैक’ सीरीज पर घमासान मचा हुआ है। यह विवाद विमान को हाइजैक करने वाले अपहरणकर्ताओं के नाम से जुड़ा है। आइये जानते हैं कि आखिर कंधार हाइजैक की असली कहानी क्या है…
हाल ही में आई वेब सीरीज ‘आईसी-814: द कंधार हाइजैक’ विवादों में घिर गई है। विवाद बढ़ने पर भारत सरकार ने नेटफ्लिक्स की कंटेंट प्रमुख मोनिका शेरगिल को तलब किया। इसके बाद मोनिका शेरगिल ने सूचना प्रसारण मंत्रालय के सचिव संजय जाजू से मुलाकात की। बैठक के बाद नेटफ्लिक्स बयान जारी करके सीरीज में बदलावों की भी जानकारी दी।
IC-814 क्या है? अमृतसर में IC-814 का क्या हुआ? विमान कंधार कैसे पहुंचा? कंधार में सात दिन क्या हुआ? यात्रियों की वापसी के बाद IC-814 का क्या हुआ? जिन आतंकियों ने विमान हाईजैक किया उनका क्या नाम था? भोला और शंकर नाम से संबोधित करने पर विवाद हो रहा है उसका क्या? विवाद के बाद नेटफ्लिक्स ने क्या किया? आइये बात को समझते हैं…
IC-814 क्या है?
फ्लाइट IC-814 एक एयरबस 300 विमान था। 24 दिसंबर 1999 को यह फ्लाइट काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए उड़ान भरने वाली थी। शाम करीब चार बजे तक सभी यात्री विमान में बैठ चुके थे। शाम 4.39 तक यह विमान भारतीय एयरस्पेस में पहुंच गया था। 15 मार्च, 2000 को संसद में तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री अजित कुमार पांजा ने संसद में बयान देकर विमान अपहरण घटना के सभी पहलुओं को सदन के समक्ष रखा था। बयान के अनुसार, 24 दिसंबर को शाम 04:53 बजे इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 को अपहृत कर लिया गया। यह विमान 24 दिसंबर को काठमांडू से दिल्ली जाने वाला था। 04:56 बजे एयर ट्रैफिक कंट्रोल, (ATC) दिल्ली को अपहरण की पहली सूचना मिली। उस दौरान यह बताया गया कि अपहरणकर्ता कह रहे थे कि विमान को लाहौर ले जाया जाए। हालांकि, लाहौर ATC से लैंड करने की अनुमति नहीं देने की वजह से शाम 07 बजे विमान अमृतसर हवाई अड्डे पर उतरा।
अमृतसर में IC-814 का क्या हुआ?
शाम 07 बजे अमृतसर हवाई अड्डे पर उतरते ही अपहरणकर्ताओं ने विमान में ईंधन भरने की मांग की। इस दौरान विमान का इंजन चालू रहा। जब अपहरणकर्ताओं से रिफ्यूलिंग के लिए इंजन बंद करने के लिए कहा गया तो उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया। 07:49 बजे विमान को अपहरणकर्ताओं द्वारा बिना ईंधन भरे अमृतसर से उड़ान भरने के लिए मजबूर किया गया। यह भी ATC अमृतसर की अनुमति के बिना था।
दुबई कैसे पहुंचा IC-814?
अमृतसर से उड़ान भरने के बाद विमान ने एक बार फिर लाहौर का रुख किया। रात 08:01 बजे विमान पाकिस्तान के लाहौर में उतरा। लाहौर एटीसी ने विमान को उतरने की अनुमति तब दी, जब पायलट ने एटीसी लाहौर को बताया कि ईंधन खत्म हो जाने के कारण उसे विमान को क्रैश-लैंड करना पड़ेगा। लाहौर में विमान में ईंधन भरा गया। रात 10:32 बजे विमान ने काबुल के लिए उड़ान भरी। काबुल से यह सूचना दी गई कि वहां रात में उतरने की कोई सुविधा नहीं है। ऐसे में विमान दुबई स्थित वायुसेना अड्डे पर उतरने के लिए रवाना हो गया और 25 दिसंबर 1999 को रात 01:32 बजे यह वायुसेना अड्डे पर उतरा।
दुबई में आतंकियों ने कैसे कुछ यात्रियों को छोड़ा?
संसद में सरकार के दिए जवाब के मुताबिक भारतीय राजदूत लगातार यूएई अधिकारियों के संपर्क में थे। यूएई अधिकारियों और अपहरणकर्ताओं के बीच बातचीत के बाद 27 यात्रियों की रिहाई सुनिश्चित की गई। इन यात्रियों में महिलाएं और बच्चे शामिल थे। रूपिन कत्याल नाम के एक यात्री को अपहरणकर्ताओं ने चाकू मार दिया था जिनकी बाद में मौत हो गई थी। रूपिन का शव भी यहां उतारा गया। फिर उन्हें 25 दिसंबर को नागरिक उड्डयन मंत्री द्वारा एक विशेष विमान में भारत वापस लाया गया।