कटनी की बेटियों का नेशनल मंच पर परचम—जेतवानी सिस्टर्स ने रेसलिंग में रचा स्वर्णिम इतिहास,किरन और नवल जेतवानी ने डीएवी नेशनल चैम्पियनशिप में जीते स्वर्ण–रजत पदक, प्रदेश और विद्यालय का बढ़ाया मान

कटनी की बेटियों का नेशनल मंच पर परचम—जेतवानी सिस्टर्स ने रेसलिंग में रचा स्वर्णिम इतिहास,किरन और नवल जेतवानी ने डीएवी नेशनल चैम्पियनशिप में जीते स्वर्ण–रजत पदक, प्रदेश और विद्यालय का बढ़ाया मा

कटनी-कहते हैं अगर इरादे मजबूत हों, तो सीमित संसाधन भी रास्ता नहीं रोक सकते। इस कथन को सच कर दिखाया है डीएवी एसीसी स्कूल, कटनी की होनहार छात्रा बहनों—किरन जेतवानी और नवल जेतवानी ने, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर की कुश्ती प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन कर जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है।
नोएडा (उत्तर प्रदेश) के सेक्टर-21ए स्थित नोएडा इंडोर स्टेडियम में जनवरी 2026 में आयोजित डीएवी शालेय राष्ट्रीय रेसलिंग प्रतियोगिता 2025-26 में दोनों बहनों ने बालिका वर्ग में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए पदक अपने नाम किए।

इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय प्रतियोगिता में किरन जेतवानी (अंडर-17, 75 किलोग्राम भार वर्ग) ने स्वर्ण पदक
नवल जेतवानी (अंडर-14, 62 किलोग्राम भार वर्ग) ने रजत पदक
अपने नाम कर विद्यालय, शहर और मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ाया।
इससे पहले भी दोनों बहनों ने सांसद खेल महोत्सव (कटनी) में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। इसके बाद संभागीय डीएवी शालेय स्पर्धा, बीना में भी गोल्ड मेडल जीतकर राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए क्वालीफाई किया और वहां भी अपना परचम लहराया।
इस तरह— जिला स्तर
, संभागीय स्तर,
राष्ट्रीय स्तर तक
हर मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए इन बहनों ने यह साबित कर दिया कि बेटियाँ किसी से कम नहीं हैं।

किरन जेतवानी (16 वर्ष), कक्षा 11वीं और नवल जेतवानी (13 वर्ष), कक्षा 8वीं की छात्रा हैं। इनके पिता विजय जेतवानी ऑटो पार्ट्स व्यवसाय से जुड़े हैं और माता श्रीमती पायल जेतवानी पत्रकार होने के साथ-साथ भारतीय सिंधु सभा महिला शाखा की अध्यक्ष भी हैं।
विशेष बात यह है कि दोनों बहनों ने बहुत कम समय में रेसलिंग जैसे कठिन खेल को अपनाया, जबकि जिले में इस खेल के लिए न तो पर्याप्त कोच उपलब्ध हैं और न ही विशेष सुविधाएं। इसके बावजूद अपने परिवार, समाज और विद्यालय के सहयोग से उन्होंने यह मुकाम हासिल किया।
छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न सिंधी समाज संगठनों ने भी इन बेटियों को बधाइयाँ देते हुए कहा कि पढ़ाई के साथ खेल बच्चों के सर्वांगीण विकास का आधार बनते हैं और यही उन्हें आत्मनिर्भर बनाता है।

किरन और नवल की यह उपलब्धि केवल पदकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन हजारों बालिकाओं के लिए प्रेरणा है, जो सपने तो देखती हैं लेकिन संसाधनों की कमी के कारण पीछे रह जाती हैं। इन बहनों ने साबित कर दिया कि हौसला हो तो रास्ते खुद बनते हैं।
बेटियाँ भी चैंपियन बनती हैं l

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