कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई बंद हुई तो लाल सिलेंडर होने लगा ब्लैक, इसलिए भी बढ़ी परेशानी, प्रशासनिक दावों से मेल नहीं खा रही जमीनी हकीकत

कटनी(YASHBHARAT.COM)। शहर में रसोई गैस की कमी न होने पर भी उपभोक्ता नए नियमों, धीमी प्रक्रिया और होम डिलीवरी की अव्यवस्था से परेशान हैं। 25 दिन की बुकिंग सीमा और 12 सिलेंडर की वार्षिक सीमा से दिक्कतें बढ़ रही हैं। बिना कनेक्शन वालों की भीड़ और तकनीकी समस्याएं भी परेशानी का कारण बन रही हैं, जिससे कई जगह हंगामे हो रहे हैं। इसके अलावा कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई बंद होने से कई लोग आपदा में अवसर की तलाश करते हुए लाल गैस सिलेंडर ब्लैक करने लगे हैं। क्योंकि कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई बंद होने से होटल, ढाबा, रेस्टारेंट संचालक लाल सिलेंडर की अच्छी कीमत देकर उन्हे खरीद रहे हैं। इसलिए लोगों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। हालांकि कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देश पर अधिकारियों की टीम के द्धारा सोमवार को की गई छापेमारी के बाद आज हालात कुछ सामान्य नजर आ रहे हैं लेकिन अभी भी कई गैस एजेंसियों में लोगों को गैस के लिए परेशान होते देखा जा सकता है। बहरहाल शहर में रसोई गैस की वास्तविक किल्लत नहीं है लेकिन नए नियमों और वितरण व्यवस्था की जटिलताओं के कारण उपभोक्ताओं की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। नियमों की सख्ती और एजेंसियों की धीमी प्रक्रिया के कारण कई स्थानों पर उपभोक्ताओं और कर्मचारियों के बीच नोकझोंक की स्थिति बन रही है। दूसरी ओर होम डिलीवरी व्यवस्था पूरी तरह सुचारु नहीं हो पाई है। इसका नतीजा यह है कि बड़ी संख्या में लोग सीधे गैस एजेंसियों के वितरण केंद्रों पर पहुंच रहे हैं, जिससे वहां भीड़ और अव्यवस्था का माहौल बन रहा है। कई जगहों पर लंबी कतारें लग रही हैं और उपभोक्ताओं को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ मिलाकर प्रशासनिक दावों से जमीनी हकीकत मेल नहीं खा रही है। प्रशासन पर्याप्त गैस उपलब्ध होने का दावा कर रहा है तो जमीन में गैस सिलेंडर के लिए लोगों को परेशान होते देखा जा रहा है।
25 दिन के पहले नहीं हो सकती नई बुकिंग
नए नियमों के अनुसार उपभोक्ता पिछला सिलेंडर लेने के 25 दिन बाद ही नया सिलेंडर बुक कर सकते हैं। इस नियम के कारण कई परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यदि किसी घर में गैस निर्धारित समय से पहले खत्म हो जाए तो उपभोक्ताओं के पास कोई स्पष्ट विकल्प नहीं रहता। ऐसी स्थिति में लोग एजेंसियों का चक्कर लगाने को मजबूर हो रहे हैं। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस खत्म होने के बाद उन्हें कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है, जिससे रोजमर्रा की रसोई व्यवस्था प्रभावित हो जाती है।
साल में 12 सिलेंडर की तय सीमा भी परेशानी का कारण
सरकारी नियमों के अनुसार एक उपभोक्ता को एक वर्ष में अधिकतम 12 रसोई गैस सिलेंडर ही दिए जाते हैं। इस सीमा के कारण बड़े परिवारों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिन घरों में सदस्यों की संख्या अधिक है, वहां साल में 12 सिलेंडर कई बार पर्याप्त नहीं होते। ऐसी स्थिति में लोगों को वैकल्पिक इंतजाम करने पड़ते हैं। कई परिवार गैस के उपयोग में कटौती करने या अन्य ईंधन का सहारा लेने को मजबूर हो जाते हैं। इससे घरेलू व्यवस्था पर भी असर पड़ता है।
होम डिलीवरी और एजेंसी वितरण में उलझन
गैस वितरण व्यवस्था में एक बड़ी समस्या होम डिलीवरी और एजेंसी वितरण के बीच समन्वय की कमी है। कई उपभोक्ता पहले से बुकिंग कराकर होम डिलीवरी का इंतजार करते हैं लेकिन जब वे एजेंसी पहुंचते हैं तो पाते हैं कि वहां पहुंचे अन्य लोगों को पहले सिलेंडर दे दिया गया है। नियमों के अनुसार यदि कोई उपभोक्ता एजेंसी परिसर में मौजूद हो तो उसे प्राथमिकता दी जाती है। इस कारण पहले नंबर वाले उपभोक्ताओं को भी लंबा इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनमें असंतोष बढ़ रहा है।
बिना कनेक्शन वालों की भीड़ ने बढ़ाई समस्या
शहर में बड़ी संख्या में छात्र, मजदूर और छोटे कर्मचारी लॉज या किराये के कमरों में रहते हैं। इनमें से कई लोगों के पास गैस का आधिकारिक कनेक्शन नहीं होता लेकिन वे सिलेंडर का उपयोग करते हैं। ऐसे लोग जुगाड़ या ब्लैक में सिलेंडर लेने की कोशिश में एजेंसियों के आसपास मंडराते रहते हैं। इस कारण वितरण केंद्रों पर भीड़ और अव्यवस्था की स्थिति बन जाती है। कई बार वास्तविक उपभोक्ताओं को भी लंबा इंतजार करना पड़ता है और एजेंसी कर्मियों को व्यवस्था संभालने में कठिनाई होती है।
डिलीवरी देने में भी हो रही परेशानी
गैस एजेंसियों से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि डिलीवरी कर्मियों को भी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कुछ इलाकों में लोगों के बीच विवाद की आशंका के कारण डिलीवरी कर्मी घर-घर सिलेंडर पहुंचाने में हिचकिचाते हैं। कई बार लोग दबाव बनाकर या बहस करके सिलेंडर लेने की कोशिश करते हैं। इससे वितरण व्यवस्था प्रभावित होती है और डिलीवरी प्रक्रिया भी धीमी पड़ जाती है।
सर्वर की धीमी गति से बढ़ी परेशानी
तकनीकी समस्याएं भी उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ा रही हैं। कई लोगों का कहना है कि गैस बुकिंग के दौरान सर्वर अक्सर धीमा हो जाता है। इसके कारण बुकिंग नंबर और ओटीपी आने में देरी होती है। जब उपभोक्ताओं को समय पर संदेश नहीं मिलता तो वे सीधे एजेंसी पहुंच जाते हैं। इससे वहां भीड़ बढ़ जाती है और कई बार विवाद की स्थिति भी बन जाती है।
कई जगह हो रहा हंगामा
हाल के दिनों में शहर के कुछ गैस एजेंसियों पर विवाद और हंगामे की घटनाएं भी सामने आई हैं। नईबस्ती स्थित पुरूषोत्तम गैस एजेंसी के वितरण केंद्र पर सिलेंडर लेने आए उपभोक्ताओं से केवायसी अनिवार्यता को लेकर विवाद हो गया। इस बात को लेकर लोगों ने काफी हंगामा किया। इसके कटनी गैस एजेंसी तथा गुप्ता गैस एजेंसी पर भी भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सिलेंडर लेने पहुंचे उपभोक्ताओं के बीच कहासुनी और अफरा-तफरी का माहौल बन रहा है।
एनकेजे और आयुध निर्माणी मेंं स्थिति सामान्य
हालांकि शहर की सभी एजेंसियों में स्थिति एक जैसी नहीं रही। एनकेजे स्थित रेलवे गैस एजेंसी में उपभोक्ताओं को नियमानुसार शांतिपूर्ण ढंग से सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है। वहां वितरण प्रक्रिया अपेक्षाकृत व्यवस्थित रही। इसी तरह आयुध निर्माणी गैस एजेंसी से होम डिलीवरी सेवा सामान्य रूप से संचालित हो रही है। यहां उपभोक्ताओं को ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।
व्यवस्था में सुधार की जरूरत
कुल मिलाकर शहर में रसोई गैस की उपलब्धता पर्याप्त है लेकिन नए नियमों की जटिलता और वितरण व्यवस्था की कमियों के कारण कई स्थानों पर उपभोक्ताओं को कठिनाई झेलनी पड़ रही है। यदि होम डिलीवरी व्यवस्था को मजबूत किया जाए और एजेंसियों में वितरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाए तो उपभोक्ताओं की परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है। साथ ही तकनीकी समस्याओं के समाधान और नियमों की स्पष्ट जानकारी देने से भी स्थिति में सुधार संभव है।
खास-खास
-नए नियमों से 25 दिन बाद ही बुकिंग संभव।
-होम डिलीवरी की अव्यवस्था से भीड़ बढ़ रही।
-बिना कनेक्शन वालों से भी समस्याएं उत्पन्न।
सुझाव और सतर्कता
-हमेशा अधिकृत एजेंसी से ही सिलेंडर लें।
-किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना स्थानीय गैस एजेंसी या पुलिस को दें।
-गैस लीक होने पर 1906 पर कॉल करें।
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