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इस्तीफे के बाद भी नहीं बचेंगे जस्टिस यशवंत वर्मा-सरकार संसद के मॉनसून सत्र में लाएगी महाभियोग; ये है वजह

कुवैत में बिगड़ी गुलाम नबी आजाद की तबीयत, अस्पताल में भर्ती, दुनिया के सामने पाकिस्तान को कर रहे बेपर्दा बीजेपी सांसद बैजयंत पांडा के नेतृत्व में खाड़ी देशों की यात्रा पर गए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्य गुलाम नबी आजाद की तबीयत बिगड़ गई है. उन्हें कुवैत के अस्पताल में भर्ती कराया गया है और वो अब डॉक्टरों की निगरानी में हैं. कुवैत में बिगड़ी गुलाम नबी आजाद की तबीयत, अस्पताल में भर्ती, दुनिया के सामने पाकिस्तान को कर रहे बेपर्दा गुलाम नबी आजाद TV9 Bharatvarsh TV9 Bharatvarsh | Updated on: May 28, 2025 | 6:45 AM ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान को दुनिया के सामने बेनकाब करने बीजेपी सांसद बैजयंत पांडा के नेतृत्व में खाड़ी देशों की यात्रा पर गए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्य गुलाम नबी आजाद की तबीयत बिगड़ गई है. उन्हें कुवैत के अस्पताल में भर्ती कराया गया है और वो अब डॉक्टरों की निगरानी में हैं. सांसद पांडा ने इस बारे में जानकारी दी है. सांसद बैजयंत जय पांडा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए बताया ‘हमारे प्रतिनिधिमंडल के दौरे के आधे रास्ते में गुलाम नबी आजाद को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा है. उनकी हालत स्थिर है, वो डॉक्टरों देखरेख में हैं और उनकी कुछ चिकित्सकीय जांच की जाएंगी’. इसके साथ ही सांसद ने ये भी कहा ‘बहरीन और कुवैत में बैठकों में उनका योगदान अत्यधिक प्रभावशाली था और वे बिस्तर पर पड़े होने से निराश हैं. हम सऊदी अरब और अल्जीरिया में उनकी उपस्थिति को बहुत याद करेंगे’. Halfway into our delegation’s tour, Shri @ghulamnazad has had to be admitted to hospital. He is stable, under medical supervision, and will be undergoing some tests and procedures . His contributions to the meetings in Bahrain and Kuwait were highly impactful, and he is pic.twitter.com/73CL9nqQGl — Baijayant Jay Panda (@PandaJay) May 27, 2025 गुलाम नबी आजाद ने जताया आभार वहीं गुलाम नबी आजाद ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा ‘मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि कुवैत में भीषण गर्मी के कारण मेरे स्वास्थ्य पर असर पड़ने के बावजूद, ईश्वर की कृपा से मैं ठीक हूं. सभी टेस्ट के नतीजे सामान्य हैं. आपकी चिंता और प्रार्थनाओं के लिए सभी का धन्यवाद. यह वास्तव में मेरे लिए बहुत मायने रखता है.’ Blessed to share that despite the extreme heat in Kuwait affecting my health, by Gods grace Im doing fine and recovering well. All test results are normal. Thank you all for your concern and prayers — it truly means a lot! — Ghulam Nabi Azad (@ghulamnazad) May 27, 2025 प्रतिनिधिमंडल में ये लोग शामिल बैजयंत पांडा के नेतृत्व में गए प्रतिनिधिमंडल में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे, भाजपा सांसद फांगनोन कोन्याक, भाजपा सांसद रेखा शर्मा, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) सांसद असदुद्दीन ओवैसी, भाजपा सांसद सतनाम सिंह संधू और भारतीय राजनयिक हर्ष श्रृंगला शामिल हैं. 23 मई को बहरीन और 25 मई को कुवैत का दौरा पांडा और 76 साल के आजाद उन सात बहुदलीय प्रतिनिधिमंडलों में से एक में शामिल हैं जिन्हें भारत ने अलग-अलग देशों में भेजा है. इन प्रतिनिधिमंडलों का काम आतंकवाद के प्रति भारत की प्रतिक्रिया के बारे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अवगत कराना है. प्रतिनिधिमंडल ने 23 मई को बहरीन और 25 मई को कुवैत का दौरा किया, जहां आजाद ने दोनों देशों के नेताओं के साथ बैठकों में भाग लिया. ‘बैठकों में आजाद का योगदान अत्यंत प्रभावशाली’ पांडा ने कहा कि बहरीन और कुवैत में हुई बैठकों में आजाद का योगदान अत्यंत प्रभावशाली था, और उनके बीमार हो जाने से वह मायूस हैं. मंगलवार को प्रतिनिधिमंडल के साथ सऊदी की राजधानी पहुंचे पांडा ने कहा, ‘सऊदी अरब और अल्जीरिया में उनकी उपस्थिति हमें बहुत खलेगी.इस यात्रा के दौरान, प्रतिनिधिमंडल विभिन्न राजनीतिक व्यक्तियों, सरकारी अधिकारियों, विचारकों और भारतीय समुदाय के सदस्यों के साथ बातचीत करेगा. कांग्रेस ने आजाद के स्वास्थ्य पर जताई चिंता इस बीच कांग्रेस ने आजाद के अस्पताल में भर्ती होने पर चिंता व्यक्त की और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आजाद का नाम लिए बगैर सोशल मीडिया पर कहा ‘यह जानकर चिंता हुई कि पाकिस्तानी आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति को मजबूत करने के लिए भेजे गए उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों में से एक को कुवैत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है’ आजाद लंबे वक्त तक कांग्रेस में रहे थे और उन्होंने 2022 में कांग्रेस को छोड़कर अपनी डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी बना ली थी.

इस्तीफे के बाद भी नहीं बचेंगे जस्टिस यशवंत वर्मा-सरकार संसद के मॉनसून सत्र में लाएगी महाभियोग; ये है वजह।  भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक अत्यंत दुर्लभ और सख्त कदम उठाते हुए केंद्र सरकार इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग (Impeachment) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, जस्टिस वर्मा द्वारा पिछले दिनों दिए गए इस्तीफे को सरकार ने अभी तक मंजूरी नहीं दी है। दावा किया जा रहा है कि सरकार आगामी मॉनसून सत्र में संसद के भीतर उन्हें पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा करा सकती है।

जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की जांच कर रही विशेष तीन सदस्यीय समिति ने अपनी गोपनीय रिपोर्ट लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सौंप दी है। सरकार इस मामले को तार्किक अंत तक ले जाकर भविष्य के लिए एक कड़ा और सख्त संदेश देना चाहती है।

 बंगले में लगी आग और मिले जले हुए नोट: क्या है पूरा मामला?

जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ इस ऐतिहासिक कार्रवाई की शुरुआत पिछले साल हुई एक अजीबोगरीब घटना से हुई थी:

200 से अधिक सांसदों ने किए थे हस्ताक्षर, स्पीकर ने बनाई थी समिति

इस भ्रष्टाचार मामले को लेकर जुलाई 2025 में संसद के भीतर भारी बवाल हुआ था, जहाँ 200 से अधिक सांसदों ने जस्टिस वर्मा को पद से हटाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने 12 अगस्त को एक 3 सदस्यीय न्यायाधीश जांच समिति का गठन किया था। इसी समिति ने पिछले हफ्ते अपनी रिपोर्ट स्पीकर को सौंपी है, जिसे जुलाई के तीसरे हफ्ते में शुरू होने वाले मॉनसून सत्र में संसद के दोनों सदनों पटल पर रखा जाएगा।इस्तीफे के बाद भी नहीं बचेंगे जस्टिस यशवंत वर्मा-सरकार संसद के मॉनसून सत्र में लाएगी महाभियोग; ये है वजह

क्या इस्तीफे के बाद भी चल सकता है महाभियोग?

संसद द्वारा बर्खास्त किए जाने और बदनामी के डर से जस्टिस यशवंत वर्मा ने पिछले दिनों अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, ताकि उनके खिलाफ चल रही कार्यवाही रुक सके। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, उनका कार्यकाल 5 जनवरी, 2031 तक था।

पारदर्शिता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता: हालांकि, सरकार से जुड़े जानकारों का कहना है कि महज इस्तीफा दे देने से भ्रष्टाचार के इतने गंभीर मामले को रफा-दफा नहीं किया जा सकता। सरकार न्यायपालिका में जवाबदेही और पारदर्शिता के प्रति अपनी जीरो-टॉलरेंस नीति दिखाना चाहती है। यही वजह है कि इस्तीफा स्वीकार करने के बजाय संसद से महाभियोग पारित कराने की तैयारी है। दूसरी तरफ, विपक्ष भी इस पूरे मामले पर पैनी नजर रखे हुए है और मॉनसून सत्र में इस मुद्दे पर संसद के भीतर तीखी बहस होने के पूरे आसार हैं।

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