JDS-कांग्रेस के बीच मिनिस्ट्री बंटवारे का यह होगा फॉर्मूला

नई दिल्ली। जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) प्रमुख एचडी कुमारस्वामी 23 मई, बुधवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इससे पहले खबरें आईं थीं कि वे 21 मई, सोमवार को दिन में 12 से 1 बजे के बीच शपथ लेंगे। शनिवार रात को जेडीएस के राष्ट्रीय महासचिव दानिश अली ने यह जानकारी मीडिया को दी।

इस बीच कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से जानकारी दी गई है कि कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन वाली सरकार में 33 मंत्री शपथ ले सकते हैं। इसमें 20 कांग्रेस से और 13 जेडीएस के विधायक होंगे। इसके साथ ही बताया जा रहा है कि डीके शिवकुमार को ऊर्जा मंत्री का पद मिल सकता है। कुमारस्वामी मुख्यमंत्री के अलावा वित मंत्रालय भी संभालेंगे। वहीं कांग्रेस के जी परमेश्वर को उप-मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। बाकी मंत्रालयों पर नाम तय करने के लिए कांग्रेस और जेडीएस के नेताओं के बीच आज भी बैठक हो सकती है।

इससे पहले कर्नाटक विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते सरकार बनाने का मौका मिलने के बावजूद भाजपा बहुमत का जादुई आंकड़ा छूने में नाकाम रही है। इसके बाद मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस तरह अपने तीसरे कार्यकाल में वे महज 55 घंटे ही मुख्यमंत्री की कुर्सी पर रह पाए। इससे पहले भी वे दो बार अपना कार्यकाल पूरा करने में नाकाम रहे हैं।

येदियुरप्पा के इस्तीफे के बाद अब कुमारस्वामी को 23 मई को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी। राज्यपाल वजुभाई वाला ने उनको सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हुए बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय दिया है।

शनिवार को विधानसभा सत्र में येदियुरप्पा ने विश्वास मत पेश तो किया, लेकिन उस पर मतदान से पहले ही त्यागपत्र का ऐलान कर दिया। इससे पहले करीब 20 मिनट तक उन्होंने भावुक भाषण दिया। इसमें उन्होंने कर्नाटक के विकास के लिए पूरी जिंदगी काम करने का वादा किया और यह भरोसा भी जताया कि अगले चुनाव में भाजपा 150 का आंकड़ा हासिल करेगी।

संख्या बल नहीं जुटा पाने की बेचैनी दोपहर बाद भाजपा खेमे में दिखने लगी थी। अस्थायी अध्यक्ष द्वारा सभी विधायकों को शपथ दिलाने और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक चार बजे शक्ति परीक्षण के पहले येदियुरप्पा ने अपना भाषण शुरू किया। उन्होंने जिस तरह से कर्नाटक में किसानों की आत्महत्या, पानी की समस्या और विकास की बात शुरू की और इसके लिए पूरी जिंदगी लड़ने का ऐलान किया, उससे साफ हो गया कि बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने में वे विफल रहे हैं। इसके बाद उन्होंने राजभवन जाकर त्यागपत्र दे दिया।

विधानसभा के गणित को देखते हुए कुमारस्वामी के लिए बहुमत साबित करना मुश्किल काम नहीं होगा। हालांकि, उनके सामने गठबंधन को एकजुट रखने की चुनौती होगी। कांग्रेसस के कई वरिष्ठ नेता जदएस के साथ गठबंधन पर सार्वजनिक तौर पर सवाल उठा चुके हैं। विधानसभा चुनाव दोनों दलों ने एक-दूसरे के खिलाफ लड़ा था।

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