दुनिया का सबसे ऊंचा बांध ‘शुआंगजियांगकोउ’ चालू; लेकिन क्या यही है भारत के लिए ‘वॉटर बम’? जानें असली सच

दुनिया का सबसे ऊंचा बांध ‘शुआंगजियांगकोउ’ चालू; लेकिन क्या यही है भारत के लिए 'वॉटर बम'? जानें असली सच

दुनिया का सबसे ऊंचा बांध ‘शुआंगजियांगकोउ’ चालू; लेकिन क्या यही है भारत के लिए ‘वॉटर बम’? जानें असली सच

बीजिंग/नई दिल्ली: चीन ने बुनियादी ढांचे और जल-बिजली (Hydropower) के क्षेत्र में एक और अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। दक्षिण-पश्चिम चीन के सिचुआन प्रांत में स्थित शुआंगजियांगकोउ (Shuangjiangkou) हाइड्रोपावर स्टेशन की पहली जनरेटिंग यूनिट को सफलतापूर्वक पावर ग्रिड से जोड़ दिया गया है। इसके साथ ही दुनिया के सबसे ऊंचे बांध से आधिकारिक तौर पर बिजली का उत्पादन शुरू हो गया है।

हालांकि, इस मेगा प्रोजेक्ट के शुरू होते ही इंटरनेट और मीडिया में एक बड़ा भ्रम फैल गया है। कई जगह इस बांध को तिब्बत की यारलुंग त्सांगपो (ब्रह्मपुत्र) नदी पर बनने वाले “मेडोग मेगा डैम” के साथ जोड़कर इसे भारत के लिए ‘वॉटर बम’ बताया जा रहा है। आइए ग्राउंड रिपोर्ट के जरिए समझते हैं कि इस ऐतिहासिक बांध की असलियत क्या है और भारत के लिए चिंता की असली वजह क्या है।

1. शुआंगजियांगकोउ डैम: दुनिया का सबसे ऊंचा बांध (315 मीटर)

चीन के सिचुआन प्रांत में बनकर तैयार हुआ यह बांध इंजीनियरिंग का एक अद्भुत नमूना है।

2. फैक्ट चेक: क्या यह बांध भारत के लिए ‘वॉटर बम’ है?

उत्तर: नहीं, यह बांध भारत के लिए कोई खतरा नहीं है। दरअसल, सोशल मीडिया और खबरों में दो अलग-अलग चीनी बांध परियोजनाओं को आपस में मिला दिया गया है। भारत के लिए चिंता का विषय शुआंगजियांगकोउ डैम नहीं, बल्कि चीन का एक दूसरा प्रस्तावित प्रोजेक्ट है। आइए दोनों का अंतर समझते हैं:

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भ्रम बनाम हकीकत: दो अलग बांधों की कहानी

  1. शुआंगजियांगकोउ डैम (जो अब शुरू हुआ है): यह चीन के अंदरूनी हिस्से (सिचुआन प्रांत) में दडू नदी पर है। इसका पानी भारत या बांग्लादेश की तरफ नहीं आता। इसलिए इससे भारत को कोई खतरा नहीं है।

  2. मोटुओ / मेडोग मेगा डैम (जिससे भारत चिंतित है): यह चीन का वह महाप्रोजेक्ट है जिसे “वॉटर बम” कहा जा रहा है। यह तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी पर प्रस्तावित है, जिसे भारत में ब्रह्मपुत्र और बांग्लादेश में जमुना कहा जाता है। यह प्रोजेक्ट अरुणाचल प्रदेश की सीमा के पास ‘ग्रेट बेंड’ (Great Bend) के पास बनाया जाना है, जहां नदी घोड़े की नाल के आकार में घूमकर भारत में प्रवेश करती है। इसकी अनुमानित क्षमता 60,000 मेगावाट है और इसकी अनुमानित लागत करीब 168 अरब डॉलर है।दुनिया का सबसे ऊंचा बांध ‘शुआंगजियांगकोउ’ चालू; लेकिन क्या यही है भारत के लिए ‘वॉटर बम’? जानें असली सच

3. भारत और बांग्लादेश के लिए क्यों है चिंता?

विशेषज्ञों का कहना है कि जब चीन तिब्बत वाले मेडोग मेगा डैम का निर्माण पूरा कर लेगा, तो ब्रह्मपुत्र नदी के पानी पर उसका पूरा नियंत्रण हो जाएगा।

निष्कर्ष: चीन ने सिचुआन में 315 मीटर ऊंचा दुनिया का सबसे ऊंचा बांध (शुआंगजियांगकोउ) बनाकर बिजली उत्पादन तो शुरू कर दिया है, जो उसकी घरेलू ऊर्जा नीति का हिस्सा है। लेकिन भारत और बांग्लादेश की नजरें तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर बनने वाले चीन के दूसरे ‘मेडोग मेगा डैम’ पर टिकी हैं, जो सामरिक और पर्यावरणीय रूप से दक्षिण एशिया के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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