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AI पर गर्मी का अटैक: चिलचिलाती धूप में हांफने लगे टेक कंपनियों के डेटा सेंटर, ब्लैकआउट के खतरे के बीच बदला गया डिजाइन

AI पर गर्मी का अटैक: चिलचिलाती धूप में हांफने लगे टेक कंपनियों के डेटा सेंटर, ब्लैकआउट के खतरे के बीच बदला गया डिजाइन

AI पर गर्मी का अटैक: चिलचिलाती धूप में हांफने लगे टेक कंपनियों के डेटा सेंटर, ब्लैकआउट के खतरे के बीच बदला गया डिजाइन

AI पर गर्मी का अटैक: चिलचिलाती धूप में हांफने लगे टेक कंपनियों के डेटा सेंटर, ब्लैकआउट के खतरे के बीच बदला गया डिजाइन

टेक डेस्क। वैश्विक स्तर पर बढ़ रही भीषण गर्मी और तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन (Climate Change) ने अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में भी संकट खड़ा कर दिया है। हालात यह हैं कि सिर्फ इंसान ही नहीं, बल्कि दुनिया को आधुनिक बनाने वाला एआई भी अब भीषण गर्मी के आगे हांफने लगा है। माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) और एनवीडिया (Nvidia) जैसी दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियां इस समय भारी तनाव में हैं, क्योंकि उनके करोड़ों डॉलर के एआई डेटा सेंटर्स (AI Data Centers) अत्यधिक तापमान के कारण तबाह होने के कगार पर पहुंच गए हैं।

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क्यों लग रही है एआई को गर्मी?

एआई डेटा सेंटर्स को चलाने के लिए बेहद शक्तिशाली और एडवांस चिप्स का इस्तेमाल किया जाता है। ये चिप्स काम करते समय भारी मात्रा में गर्मी पैदा करते हैं। इन्हें ठंडा रखने के लिए हर दिन कई लाख लीटर पानी और भारी-भरकम बिजली की जरूरत होती है।

एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक:

“डेटा सेंटर में खपत होने वाली कुल बिजली का लगभग 40% हिस्सा केवल इन हाई-टेक चिप्स को ठंडा रखने (Cooling) में खर्च हो जाता है।”

पावर ग्रिड फेल होने और ब्लैकआउट का खतरा

एक बड़े एआई डेटा सेंटर को सुचारू रूप से चलाने के लिए उतनी ही बिजली की जरूरत होती है, जितनी लाखों घरों को रोशन करने के लिए चाहिए। गर्मियों के मौसम में जब शहरों में एसी और कूलरों के कारण बिजली की डिमांड पहले से ही चरम पर होती है, तब डेटा सेंटर्स के लिए पावर ग्रिड्स पर दबाव बेहद बढ़ जाता है।

हाल ही में इटली के ट्यूरिन शहर में जब तापमान 38 डिग्री सेल्सियस पहुंचा, तो जमीन के नीचे बिछी केबल अत्यधिक गर्म होने से बार-बार ब्लैकआउट की समस्या खड़ी हो गई। विश्लेषकों का मानना है कि यदि गर्मी ऐसे ही बढ़ती रही तो पावर ग्रिड पूरी तरह ठप हो सकते हैं।

डेटा सेंटर्स पर मंडराता संकट: मुख्य आंकड़े

पैमाना रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
मौसम की मार का जोखिम ज्यूरिख इंश्योरेंस के मुताबिक, दुनिया के 79% डेटा सेंटर मौसमी मार के सीधे खतरे में हैं।
स्थान परिवर्तन इस साल 64% टेक कंपनियों ने शहरों की बिजली किल्लत से बचने के लिए अपने डेटा सेंटर ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में शिफ्ट किए हैं।
ग्रामीण इलाकों के नए खतरे दूरदराज के क्षेत्रों में शिफ्ट करने पर अब डेटा सेंटर्स को तेज हवाओं, चक्रवात और ओलावृष्टि (Hailstorms) के कारण कूलिंग टावर टूटने के नए खतरों का सामना करना पड़ रहा है।

लागत बढ़ने से बढ़ी कंपनियों की टेंशन

क्लाइमेट चेंज और भीषण गर्मी की वजह से टेक कंपनियों की लागत (Cost) कई गुना बढ़ गई है। अब नए डेटा सेंटर स्थापित करते समय कंपनियों को ‘क्लाइमेट चेंज फैक्टर’ की मोटी लागत को अलग से बजट में जोड़ना पड़ रहा है। शहरों में बिजली की कमी और ग्रामीण इलाकों में प्राकृतिक आपदाएं, दोनों ही मोर्चों पर टेक कंपनियां फंस चुकी हैं।

क्या है समाधान? टेक दिग्गजों ने निकाला नया रास्ता

इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए टेक कंपनियों ने अब अपने डेटा सेंटर्स के पारंपरिक डिजाइन को पूरी तरह बदलने का फैसला किया है:

राहत की बात: इन वैकल्पिक व्यवस्थाओं और लिक्विड कूलिंग तकनीकों की मदद से बिजली की कुल लागत में करीब 4% तक की कटौती देखी जा रही है। हालांकि, यह तकनीक भविष्य की रिकॉर्ड तोड़ गर्मी का मुकाबला करने में कितनी कारगर साबित होगी, यह आने वाला समय ही बताएगा।

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