जबलपुर। जिले में 10वीं और 12वीं कक्षा के नतीजों को सुधारने पर फोकस शुरू हो गया है। लोक शिक्षण संचालनालय ने इस बार मेंटर तय किए है जो कमजोर बच्चों को खास ध्यान देंगे। उनके लिए अतिरिक्त कक्षाएं लगाई जाएगी ताकि पढ़ाई का स्तर सुधार किया जाए। बीते दिनों विभाग ने इसका ब्लूप्रिंट बनाया है। जबलपुर जिले में 34 स्कूलों के विद्यार्थियों को चिन्हित किया गया है। एक मेंटर के भरोसे पांच स्कूल है जो मासिक समीक्षा करेंगे।
दरअसल कोरोना की वजह से बिना परीक्षा के ही विद्यार्थियों को बोर्ड कक्षाओं में भेजा गया है। ऐसे में उनकी शैक्षणिक हालात को बेहतर करने के लिए तिमाही परीक्षा हुई। जिसमें त्रैमासिक परीक्षा में 10वीं कक्षा में 45 फीसद और 12वीं कक्षा में 31 फीसद विद्यार्थी अनुत्तीर्ण हुए। ऐसे विद्यार्थियों को अतिरिक्त ध्यान देने के लिए विभाग ने योजना बनाई है। सबसे पहले विभाग ने बच्चों की प्रतिभा के आधार पर उन्हें ए,बी,सी,डी और ई श्रेणी में बांटा है।
जो विद्यार्थी 33 से 20 फीसद तक अंक लेकर आए उन्हें डी श्रेणी में रखा गया है। वहीं शून्य से 20 अंक तक लाने वालों को ई श्रेणी दी गई है। इन दोनों श्रेणी के लिए ही विभाग ने सुधार कार्यक्रम तैयार किया है। इनके लिए रेमेडियल क्लास लगाने को कहा गया है।
आंकलन निरंतर हो: विद्यार्थियों का आंकलन करने के लिए बोर्ड परीक्षा से जुड़े प्रश्नों के लिए अर्द्धवार्षिक परीक्षा और प्री बोर्ड परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा टिप्स और ट्रिक्स वर्कशाप का आयोजन होगा। जिसमें उपयोगी शार्टकट के बारे में जानकारी दी जाएगी।
कहां होंगे मेंटर: ऐसे विद्यालय जहां कक्षा 10वीं बोर्ड का पिछले तीन साल निरंतर प्रदर्शन कमजोर है वहां मेंटर होंगे। ब्लाक अधिकारी या शिक्षा अधिकारी मेंटर होंगे जो दो सप्ताह में न्यूनतम एक बार स्कूल का निरीक्षण करेंगे। बोर्ड के नतीजों के लिए मेंटर्स ही जवाबदार होंगे।
जिले के कमजाेर प्रदर्शन वालेे स्कूलों का चयन किया जा चुका है। पांच-पांच स्कूलों में मेंटर्स बनाए गए हैं। अभी व्यापक कार्य योजना बनाई जा रही है।
घनश्याम सोनी, जिला शिक्षा अधिकारी

