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जबलपुर। जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय अब खेतों में ड्रोन का उपयोग करेगा और साथ ही खेती में ड्रोन के अनुप्रयोग पर अनुसंधान भी करेगा।
आधुनिक और मशीनीकृत कृषि के समय में ड्रोन के उपयोग ने महत्व प्राप्त कर लिया है और इसका उपयोग कई कृषि कार्यों को करने में किया जा रहा है।
जिसमें उर्वरकों, कीटनाशकों से जुड़े विशिष्ट अनुप्रयोग से शुरू होकर फसल के स्वास्थ्य पर जैविक और अजैविक कारकों के प्रभाव का सटीक रूप से पता लगाना शामिल हैं।
कुलपति डा. प्रदीप कुमार बिसेन के मार्गदर्शन में जेएनकेविवि में फसल संरक्षण में ड्रोन प्रोद्योगिकी के अनुप्रयोग पर अनुसंधान विषयक परियोजना का उद्घाटन किया गया। मेसर्स सिनजेंटा इंडिया पुणे द्वारा प्रायोजित इस परियोजना के अंतर्गत जेएनकेविवि के कृषि विज्ञानी सोयाबीन के क्षेत्र में विशेष अनुसंधान करेंगे। इस दौरान खेतों में करीब दो घंटे तक 16 लीटर क्षमता छिड़काव टैंक लेकर ड्रोन उड़ाकर परीक्षण किया गया। यहां उपयोग में लाए गए ड्रोन से एक एकड़ में मात्र छह मिनट में कीटनाशक का छिड़काव आसानी से किया जा सकता है। इससे समय और श्रमशक्ति का बचाव होता है।
इस मौके पर अधिष्ठाता कृषि संकाय डा. धीरेंद्र खरे, संचालक अनुसंधान सेवाएं डा. जीके कौतू, संचालक विस्तार सेवाएं डा. दिनकर प्रसाद शर्मा, संचालक प्रक्षेत्र डा. डीके पहलवान, संचालक शिक्षण डा. अभिषेक शुक्ला, अधिष्ठाता कृषि अभियांत्रकिी महाविद्यालय डॉ. अतुल श्रीवासतव, आइपीआरओ डा. एमए खान व अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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