भारत की बड़ी रणनीति: खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने के लिए अमेरिका से LPG आयात में रिकॉर्ड उछाल, बनेगा 30 दिन का रिजर्व
नई दिल्ली: भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए एक बड़े रणनीतिक बदलाव पर काम कर रहा है। देश अब न केवल रसोई गैस (LPG) के आयात के नए स्रोत तलाश रहा है, बल्कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 30 दिनों का स्ट्रैटेजिक एलपीजी रिजर्व बनाने की भी तैयारी में है। इस रणनीति का सबसे बड़ा असर भारत-अमेरिका व्यापार में देखने को मिल रहा है, जहां अमेरिका से होने वाले एलपीजी आयात में अप्रत्याशित तेजी आई है।
अमेरिका से आयात में भारी उछाल (2026 के आंकड़े)
चिपिंग और कमोडिटी डेटा ट्रैकर Kpler के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में भारत के कुल एलपीजी आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 8% से भी कम थी। लेकिन साल 2026 में इसमें हैरान करने वाली तेजी देखी गई है:
-
जनवरी: ~12%
-
फरवरी: 13%
-
मार्च: 37%
-
अप्रैल: 40%
-
मई: 55%
-
जून: 65% के रिकॉर्ड स्तर पर
अमेरिका के अलावा, भारत अब अर्जेंटीना, नाइजीरिया और मलेशिया जैसे अन्य देशों से भी एलपीजी खरीदने के विकल्प तलाश रहा है, ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
सरकार की इस मेगा स्ट्रेटजी के 5 बड़े पहलू
1. ऊर्जा सुरक्षा होगी बेहद मजबूत
भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 60-65% हिस्सा आयात करता है। अब तक इसका एक बड़ा हिस्सा सऊदी अरब, यूएई, कतर और कुवैत जैसे खाड़ी देशों से आता रहा है। यदि खाड़ी क्षेत्र में युद्ध या कोई प्रतिबंध लगता है, तो देश की गैस सप्लाई ठप होने का डर रहता है। इसी जोखिम को भांपते हुए भारत अब अमेरिका का रुख कर रहा है ताकि संकट के समय भी घरेलू बाजार में गैस की किल्लत न हो।
2. सप्लाई चेन और ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज’ के संकट से राहत
दुनिया का 20% कच्चा तेल और भारी मात्रा में एलपीजी ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) समुद्री मार्ग से गुजरती है। हाल ही में जब ईरान-इजराइल तनाव बढ़ा और अमेरिका इस विवाद में कूदा, तो ईरान ने होर्मुज को बंद कर दिया था। इसका सीधा असर भारत पर पड़ा और कमर्शियल सिलेंडर से लेकर 5 किलोग्राम वाले छोटू सिलेंडर तक के दाम बढ़ गए थे। अमेरिका से आयात बढ़ने के कारण अब भारत के पास एक सुरक्षित वैकल्पिक समुद्री रूट रहेगा।
3. बेहतर कीमतों पर मोलभाव (Bargaining Power) की ताकत
जब भारत केवल खाड़ी देशों से एलपीजी खरीदता था, तो कीमतों को लेकर मोलभाव की गुंजाइश कम होती थी। लेकिन अब जब अमेरिका, अर्जेंटीना और नाइजीरिया जैसे विकल्प सामने आ चुके हैं, तो सप्लायर्स के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इससे भारत को बेहतर कीमतों, शिपमेंट शर्तों और लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स में फायदा मिलेगा।
4. भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंधों को नई संजीवनी
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार फिलहाल 190 अरब डॉलर से अधिक है, जिसे 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है। ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीतियों के कारण दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में जो थोड़ी खटास आई थी, वह अब एलपीजी डील के जरिए दूर हो सकती है। अमेरिका को भारत के रूप में एक बड़ा बाजार मिलेगा, जिससे नई ट्रेड डील साइन होने के रास्ते आसान होंगे। भारत की बड़ी रणनीति: खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने के लिए अमेरिका से LPG आयात में रिकॉर्ड उछाल, बनेगा 30 दिन का रिजर्व
5. सबसे बड़ी चुनौती: परिवहन का भारी खर्च (नुकसान)
इस रणनीति का एक कमजोर पहलू भी है। खाड़ी देशों से भारत तक एलपीजी पहुंचने में महज 4 से 10 दिन लगते हैं, जबकि अमेरिका के गल्फ कोस्ट से भारत आने में 30 से 40 दिन का समय लगता है। इस लंबी दूरी के कारण फ्रेट (भाड़ा) और ईंधन का खर्च काफी बढ़ जाता है। हालांकि, कई बार अमेरिका में गैस की कीमतें बहुत कम होने से यह परिवहन लागत संतुलित हो जाती है, लेकिन वैश्विक शिपिंग दरों में उछाल आने पर यह सौदा महंगा साबित हो सकता है।
