127 कट्स का विवाद, 48 घंटे में बैन… जानिए दिलजीत की फिल्म ‘सतलुज’ पर क्यों मचा है कोहराम? खालड़ा की पत्नी का बड़ा बयान

127 कट्स का विवाद, 48 घंटे में बैन... जानिए दिलजीत की फिल्म 'सतलुज' पर क्यों मचा है कोहराम? खालड़ा की पत्नी का बड़ा बयान

127 कट्स का विवाद, 48 घंटे में बैन… जानिए दिलजीत की फिल्म ‘सतलुज’ पर क्यों मचा है कोहराम? खालड़ा की पत्नी का बड़ा बयान

मुंबई/अमृतसर। अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ की लंबे समय से विवादों में घिरी फिल्म ‘पंजाब 95’, जिसे हाल ही में नाम बदलकर ‘सतलुज’ के रूप में रिलीज किया गया था, एक बार फिर बड़े विवाद के केंद्र में आ गई है। सेंसर बोर्ड (CBFC) के साथ करीब 4 साल तक चली लंबी कानूनी जंग और 127 कट्स के भारी विवाद के बाद, मेकर्स ने इसे बिना किसी कट के 3 जुलाई को चुपचाप ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज कर दिया था। लेकिन रिलीज के महज 48 घंटों के भीतर ही इसे भारत में प्लेटफॉर्म से अचानक हटा (Ban/Unavailable) दिया गया है।

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इस अचानक लगे प्रतिबंध के बाद पंजाब की राजनीति और मनोरंजन जगत में भूचाल आ गया है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और शिरोमणि अकाली दल ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा हमला बताया है।

खालड़ा की पत्नी ने फिल्म को बताया ‘सौ फीसदी सच’

यह फिल्म पंजाब के प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और 1980-90 के दशक में पंजाब में हुए कथित फर्जी एनकाउंटरों और अवैध अंतिम संस्कारों को उजागर करने के उनके संघर्ष पर आधारित है।127 कट्स का विवाद, 48 घंटे में बैन… जानिए दिलजीत की फिल्म ‘सतलुज’ पर क्यों मचा है कोहराम? खालड़ा की पत्नी का बड़ा बयान

फिल्म की रिलीज के बाद शहीद जसवंत सिंह खालड़ा की पत्नी परमजीत कौर खालड़ा ने भावुक होते हुए इस फिल्म पर अपनी मुहर लगाई है। उन्होंने कहा:

“केवल फिल्म का नाम बदला गया है, लेकिन इसके भीतर का सच और दर्द बिल्कुल वैसा ही है। यह वही असली फिल्म है जिसे बिना किसी समझौते के बनाया गया था। यह फिल्म उस दौर की वास्तविक घटनाओं और खालड़ा साहब के संघर्ष की सच्ची गाथा को दुनिया के सामने लाती है।”

दिलजीत दोसांझ को पहले से था अंदेशा, बोले- ‘सब ने डाउनलोड कर ली’

फिल्म के ओटीटी प्लेटफॉर्म से अचानक गायब होने पर दिलजीत दोसांझ ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। दिलजीत ने सोशल मीडिया पर हिंट देते हुए कहा कि उन्हें पहले से ही इस बात का अंदेशा था कि फिल्म को हटाया जा सकता है। उन्होंने कहा:

“वही हुआ जो खालड़ा साहब के साथ हुआ था (सच्चाई को दबाने की कोशिश)। लेकिन अच्छी बात यह है कि 48 घंटों के भीतर ही यह फिल्म घर-घर पहुंच चुकी है और प्रशंसकों ने इसे पहले ही डाउनलोड कर लिया है। हमारा मकसद पूरा हुआ।”

फिल्म के निर्देशक हनी त्रेहान ने भी साफ किया कि भले ही उन्हें ‘पंजाब 95’ नाम नहीं मिला, लेकिन उन्होंने फिल्म के मूल कंटेंट और उसकी आत्मा के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं होने दी।

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