Sunday, April 26, 2026
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पश्चिम एशिया संकट का असर भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर, कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर संकट में, रेल मंत्रालय का राहत पर विचार

पश्चिम एशिया संकट का असर भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर, कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर संकट में, रेल मंत्रालय का राहत पर विचार। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर भी दिखने लगा है। खासकर कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों (CTO) का कारोबार प्रभावित हुआ है, जिससे कई कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।

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सूत्रों के मुताबिक, समुद्री कंटेनर कारोबार में गिरावट और वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ने के कारण भारत में भी कंटेनर ट्रेनों की मांग घट गई है। इसका सीधा असर निजी कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों पर पड़ा है, जिनके रेक बड़ी संख्या में निष्क्रिय पड़े हैं।

जानकारी के अनुसार, इस समय लगभग 50 कंटेनर रेक उपयोग में नहीं हैं, जो सामान्य स्थिति की तुलना में काफी अधिक है। कई ट्रेनों को बंदरगाहों तक खाली चलाना पड़ रहा है, लेकिन फिर भी ऑपरेटरों को रेलवे को हॉलेज और अन्य शुल्क देना पड़ रहा है। इससे उनका खर्च लगातार बढ़ रहा है।

कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों के संगठन ने बताया कि कम कारोबार के बावजूद रेलवे द्वारा निष्क्रिय रेक पर स्टैबिंग चार्ज वसूला जा रहा है, जिससे वित्तीय दबाव और बढ़ गया है।

स्थिति को देखते हुए रेल मंत्रालय ने इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार शुरू कर दिया है। पिछले कुछ दिनों में कई बैठकों के बाद राहत उपायों पर चर्चा हुई है, हालांकि अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

देश में कुल लगभग 700 कंटेनर ट्रेनें संचालित होती हैं, जिनमें से करीब आधी निजी ऑपरेटरों के पास हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द राहत नहीं दी गई तो लॉजिस्टिक्स लागत और सप्लाई चेन पर भी असर पड़ सकता है।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम