एक्सपायर या बची हुई दवाओं को कैसे फेंके? जानें पर्यावरण और सेहत को बचाने के सही तरीके
एक्सपायर या बची हुई दवाओं को कैसे फेंके? जानें पर्यावरण और सेहत को बचाने के सही तरीके
बीमारी ठीक होने के बाद अक्सर हमारे घरों में दवाइयां या सिरप बच जाते हैं। ज्यादातर लोग इन्हें सीधे कूड़ेदान, नाली या टॉयलेट में फेंक देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसा करना हमारी सेहत और पर्यावरण दोनों के लिए बेहद खतरनाक है?
कूड़े में दवा फेंकना क्यों है खतरनाक?
एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस: दवाओं के अवशेष पानी और मिट्टी में मिलकर बैक्टीरिया को शक्तिशाली बना देते हैं, जिससे दवाएं बेअसर होने लगती हैं।
जल और मिट्टी प्रदूषण: सीवेज या लैंडफिल से दवा के केमिकल नदियों, भूजल और पीने के पानी तक पहुंच जाते हैं।
गलत इस्तेमाल और री-सेल: लैंडफिल से एक्सपायर दवाएं कबाड़ बीनने वालों या बच्चों के हाथ लग सकती हैं, जिनका गलत इस्तेमाल या री-सेल होने का खतरा रहता है।
जीव-जंतुओं को नुकसान: पानी में रहने वाले जीवों और आवारा जानवरों के लिए ये केमिकल जानलेवा साबित हो सकते हैं।
बची और एक्सपायर दवाओं का सही निपटान (Disposal) कैसे करें?
टेक-बैक या कलेक्शन सेंटर: सबसे सुरक्षित तरीका है कि बची हुई दवाओं को हॉस्पिटल्स, फार्मेसी या टेक-बैक कलेक्शन बॉक्स (जैसे केरल का nPROUD प्रोजेक्ट) में जमा करें।
घरेलू कचरे में डालने का सही तरीका:
टैबलेट या कैप्सूल को बिना पीसे/तोड़े मिट्टी, चायपत्ती या इस्तेमाल की हुई कॉफी में मिला दें ताकि कोई दोबारा इस्तेमाल न कर सके।
इसे एक सीलबंद प्लास्टिक बैग या डिब्बे में बंद करके कूड़ेदान में डालें।
दवा के पैकेट से अपनी पर्सनल डिटेल (नाम, पर्चा आदि) हटा दें।
हाई-रिस्क मेडिसिन: कैंसर की दवाएं, इंजेक्शन, सिरिंज (सुई) और हाई-रिस्क पेनकिलर्स को घर पर न फेंकें; इन्हें अस्पताल या फार्मेसी में ही वापस करें।
इन गलतियों से बचें:
कभी भी दवाओं को सिंक, टॉयलेट में न बहाएं।
दवाओं को खुले में न जलाएं, इससे जहरीला धुआं निकलता है।