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हार्ट अटैक आने से सालों पहले ही चल जाएगा पता: सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट ने बताया ये आसान ब्लड टेस्ट, हर 4 में से 1 भारतीय के लिए खतरा

हार्ट अटैक आने से सालों पहले ही चल जाएगा पता: सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट ने बताया ये आसान ब्लड टेस्ट, हर 4 में से 1 भारतीय के लिए खतरा

नई दिल्ली: आजकल अचानक हार्ट अटैक (Heart Attack) और कार्डियक अरेस्ट से होने वाली मौतों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जिम में वर्कआउट करते समय, डांस करते हुए या दफ्तर में काम करते वक्त अचानक लोगों का गिरना और दम तोड़ देना बेहद डरावना बन चुका है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और हृदय रोग विशेषज्ञों (Cardiologists) का मानना है कि हार्ट अटैक अचानक नहीं आता, बल्कि इसके खतरे का संकेत शरीर सालों पहले ही दे सकता है।

सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. साकेत गोयल (MD, DM, FACC, FSCAI) ने एक साधारण लेकिन बेहद शक्तिशाली ब्लड टेस्ट के बारे में जानकारी साझा की है, जो हार्ट अटैक के जोखिम को वक्त रहते पहचान सकता है।

कौन सा है यह चमत्कारिक टेस्ट?

डॉ. साकेत गोयल के अनुसार, हार्ट अटैक के जेनेटिक खतरे को जानने के लिए ‘लिपोप्रोटीन (ए)’ [Lipoprotein (a) / Lp(a)] नामक एक बेहद साधारण ब्लड टेस्ट कराया जाता है।

  • मजबूत जेनेटिक फैक्टर: यह टेस्ट इतना मजबूत आनुवंशिक (Genetic) संकेतक है कि नवजात शिशु के अम्बिलिकल कॉर्ड (गर्भनाल) के सैंपल से भी यह अनुमान लगाया जा सकता है कि उसमें या उसके माता-पिता में भविष्य में हृदय रोग का कितना खतरा है।

  • हर चौथे भारतीय का स्तर बढ़ा हुआ: अध्ययनों और नैदानिक अनुभवों के अनुसार, हर 4 में से 1 भारतीय में लिपोप्रोटीन (ए) का स्तर बढ़ा हुआ पाया जाता है, जो उन्हें समय से पहले (Premature) हार्ट अटैक के जोखिम में डालता है।

क्या होता है ‘लिपोप्रोटीन (ए)’ और क्यों है खतरनाक?

लिपोप्रोटीन (ए) एक प्रकार का प्रोटीन और वसा का कम्पाउंड होता है जो लीवर में बनता है और खून में कोलेस्ट्रॉल ले जाता है:

  1. धमनियों में रुकावट (Plaque Formation): इसका बढ़ा हुआ स्तर नसों (धमनियों) में वसा को जमा करने और थक्के (Blood Clots) बनाने में मदद करता है।

  2. पारंपरिक डाइट का असर नहीं: सामान्य खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) की तरह यह केवल खान-पान या जीवनशैली बदलने से कम नहीं होता, क्योंकि यह पूरी तरह से जेनेटिक (वंशानुगत) होता है।

किन्हें जरूर कराना चाहिए यह टेस्ट?

डॉक्टर्स की सलाह के मुताबिक, यदि निम्नलिखित स्थितियां हैं तो यह टेस्ट जरूर कराना चाहिए:

  • जिनके परिवार में हार्ट अटैक या दिल की बीमारियों की हिस्ट्री रही हो।

  • जिनके घर में 55 साल (पुरुष) या 65 साल (महिला) से कम उम्र में किसी को दिल का दौरा पड़ा हो।

  • जो लोग युवावस्था में ही अपने दिल की सेहत का सटीक आकलन (Risk Assessment) करना चाहते हैं।

(ध्यान दें: जीवन में यह टेस्ट आमतौर पर केवल एक बार कराना ही काफी होता है, क्योंकि इसका स्तर जेनेटिक रूप से तय होता है और उम्र के साथ ज्यादा नहीं बदलता।)

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