हेल्थ अपडेट: क्या आप भी हैं मानसिक रूप से परेशान? सही डॉक्टर चुनने के लिए पढ़ें यह खास रिपोर्ट – yashbharat.com। भागदौड़ भरी जिंदगी और बढ़ते तनाव के बीच मानसिक बीमारियां तेजी से पांव पसार रही हैं। अक्सर लोग उदासी, घबराहट या अनिद्रा को सामान्य थकान समझकर टाल देते हैं, जो बाद में गंभीर रूप ले लेती है। सही इलाज के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि आपको साइकोलॉजिस्ट (Psychologist) की जरूरत है या साइकेट्रिस्ट (Psychiatrist) की।
1. कब लें साइकोलॉजिस्ट (Psychologist) की मदद?
साइकोलॉजिस्ट मुख्य रूप से ‘टॉक थेरेपी’ और काउंसलिंग के जरिए इलाज करते हैं। यदि आप इन लक्षणों को महसूस कर रहे हैं, तो इनसे मिलें:
भावनात्मक परेशानी: लगातार तनाव, चिंता, डर या उदासी बनी रहना।
रिश्तों में तनाव: वैवाहिक जीवन या कार्यस्थल पर तालमेल न बैठना।
व्यवहार में बदलाव: आत्मविश्वास की कमी, बार-बार नकारात्मक विचार आना या छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन।
नींद और एकाग्रता: काम में मन न लगना और नींद के पैटर्न में बदलाव होना।
2. कब जरूरी है साइकेट्रिस्ट (Psychiatrist) से इलाज?
साइकेट्रिस्ट एमबीबीएस डॉक्टर होते हैं जो दवाओं (Medication) के जरिए गंभीर मानसिक विकारों का इलाज करते हैं। इन लक्षणों में तुरंत संपर्क करें:
गंभीर डिप्रेशन: लंबे समय तक गहरी उदासी और दैनिक कार्यों में पूरी तरह अरुचि।
पैनिक अटैक: अचानक तेज घबराहट के दौरे पड़ना।
खतरनाक विचार: खुद को नुकसान पहुँचाने या आत्महत्या के विचार आना।
भ्रम (Hallucination): ऐसी आवाजें सुनाई देना या चीजें दिखाई देना जो हकीकत में नहीं हैं।
सही विशेषज्ञ का चुनाव कैसे करें?
शुरुआती लक्षण: यदि समस्या हल्की है और आप बस मन की बात साझा करना चाहते हैं, तो काउंसलिंग (साइकोलॉजिस्ट) से शुरुआत करें।
गंभीर स्थिति: यदि लक्षण शारीरिक रूप लेने लगें या अनियंत्रित हो जाएं, तो साइकेट्रिस्ट से दवा शुरू करना बेहतर है।
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