Site icon Yashbharat.com

कटनी नगर निगम में कचरा संग्रहण घोटाला: हाईकोर्ट ने शासन और EOW को जारी किया नोटिस, करोड़ों के भ्रष्टाचार का आरोप, पार्षद की याचिका पर डिवीजन बेंच ने 4 सप्ताह में मांगा जवाब

15 01 2019 15god15 c 2 18858935 3053

DJLIY¨FSF CXNXF°Fe ³F¦FS ´FdS¿FQ IZY ½FFW³F

कटनी(YASHBHARAT.COM)। नगर निगम कटनी में स्वच्छ भारत मिशन के तहत संचालित ‘डोर-टू-डोर’ कचरा संग्रहण योजना विवादों के घेरे में आ गई है। वरिष्ठ पार्षद मिथलेश जैन द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मध्यप्रदेश शासन, आर्थिक अपराध अनुसंधान विभाग (EOW), नगर निगम कटनी और नगर एवं ग्राम निवेश विभाग को नोटिस जारी किया है। न्यायालय ने इन सभी संबंधित पक्षों से 4 सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

अनुबंध की शर्तों को ताक पर रखने का आरोप

याचिका में उल्लेख किया गया है कि 7 मई 2015 को नगर निगम कटनी और रेमकी इन्वायरो इंजीनियर प्राइवेट लिमिटेड के बीच ‘रीजनल इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट’ का अनुबंध हुआ था। अनुबंध के अनुसार, कंपनी को घर-घर से कचरा एकत्रित कर उसका वैज्ञानिक तरीके से पृथक्करण (Segregation) करना था और कम्पैक्टर के माध्यम से प्लांट तक पहुंचाना था। आरोप है कि इन शर्तों का पालन किए बिना ही निगम अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी बिलों के आधार पर करोड़ों रुपए का भुगतान कर दिया गया।

वजन बढ़ाने के लिए कचरे में मिलाया ‘मलबा’

शिकायतकर्ता ने भ्रष्टाचार के चौंकाने वाले तरीके उजागर किए हैं:~

मलबे का खेल: कचरा ढोने वाले वाहनों में कचरे की जगह भारी निर्माण सामग्री (मलबा) भरकर वजन कराया गया, ताकि टनेज के आधार पर अधिक भुगतान लिया जा सके।

ट्रिपल पेमेंट: रेलवे और ऑर्डिनेंस फैक्ट्री जैसे निजी संस्थानों के कचरे को भी इसी प्रोजेक्ट में डंप दिखाकर तीन गुना भुगतान प्राप्त किया गया।

बिना छंटाई भुगतान: कचरे की छंटाई (Segregation) का काम कागजों पर दिखाकर लाखों की राशि डकारी गई।

जांच एजेंसियों की सुस्ती पर सवाल

पार्षद मिथलेश जैन का आरोप है कि इस भारी अनियमितता की शिकायत नगर निगम प्रशासन, पुलिस और ईओडब्ल्यू (EOW) तक से की गई थी। वर्ष 2023 में औपचारिक शिकायत दर्ज होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसके चलते उन्हें हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी।

अब हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद नगर निगम के गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। चार सप्ताह बाद होने वाली सुनवाई में शासन द्वारा पेश किए जाने वाले जवाब पर सबकी नजरें टिकी हैं।

Exit mobile version