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Finance Minister on 3Fs: वैश्विक संकट के बीच वित्त मंत्री का ‘3F’ पर जोर, कहा- देश में डर का माहौल बनाने की कोशिशें नाकाम होंगी

Finance Minister on 3Fs: वैश्विक संकट के बीच वित्त मंत्री का '3F' पर जोर, कहा- देश में डर का माहौल बनाने की कोशिशें नाकाम होंगी

Finance Minister on 3Fs: वैश्विक संकट के बीच वित्त मंत्री का '3F' पर जोर, कहा- देश में डर का माहौल बनाने की कोशिशें नाकाम होंगी

Finance Minister on 3Fs: वैश्विक संकट के बीच वित्त मंत्री का ‘3F’ पर जोर, कहा- देश में डर का माहौल बनाने की कोशिशें नाकाम होंगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने SIDBI के कार्यक्रम में वैश्विक संकट के बीच ईंधन, खाद और विदेशी मुद्रा (3F) को बचाने पर जोर दिया। साथ ही MSME के 8.1 लाख करोड़ के लंबित भुगतान को लेकर सरकारी कंपनियों को 45 दिन की समय-सीमा का पालन करने के निर्देश दिए। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

मुंबई। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया संकट के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए एक नया मंत्र दिया है। मुंबई में भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) के 37वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने फ्यूल (Fuel), फर्टिलाइजर (Fertilizer) और फॉरेक्स (Forex) यानी ‘3F’ पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने साफ कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल, खाद और सोने की आसमान छूती कीमतों के कारण बाहरी मोर्चे पर चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था पूरी तरह मजबूत स्थिति में है।

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 देश में भ्रम और डर फैलाने की कोई गुंजाइश नहीं

वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन (Fuel) और विदेशी मुद्रा (Forex) बचाने की हालिया अपीलों के बाद कुछ हलकों में बनाए जा रहे निराशावादी माहौल की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा:

“कुछ लोग स्थिति को लेकर यह दावा कर रहे हैं कि सब कुछ बर्बाद हो रहा है, जो कि बिल्कुल सही नहीं है। भारत में इस तरह का भय और भ्रम फैलाने की कोई गुंजाइश नहीं है। बाहरी कारणों से चुनौतियां जरूर आई हैं, लेकिन हमारी नीतिगत प्रतिक्रियाएं आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने के लिए संतुलित तरीके से तैयार की गई हैं। हमें अपने शब्दों से लोगों में विश्वास पैदा करना चाहिए।” — निर्मला सीतारमण, केंद्रीय वित्त मंत्री

 राजस्व का नुकसान, फिर भी कीमतों पर नियंत्रण

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि आम जनता को राहत देने के लिए सरकार ने डीजल और पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में कटौती की है। इस कटौती के कारण सरकार को करीब 1 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने आगे कहा कि कच्चे तेल के साथ-साथ फर्टिलाइजर (खाद) की कीमतें भी अकल्पनीय स्तर पर पहुंच चुकी हैं, जबकि सोने की ऊंची कीमतें बाहरी व्यापार घाटे पर कुछ चुनौतियां पैदा कर रही हैं। यही वजह है कि फॉरेक्स रिजर्व को बचाना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।

MSME के भुगतान को लेकर PSUs को सख्त निर्देश

सिडबी के मंच से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (MSMEs) को बड़ी राहत देते हुए वित्त मंत्री ने उनके लंबित भुगतानों पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि एमएसएमई क्षेत्र का लगभग 8.1 लाख करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है, जिससे इन उद्योगों की कार्यशील पूंजी (Working Capital) और विकास बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) और बड़ी कंपनियों को सख्त हिदायत देते हुए कहा कि वे एमएसएमई का बकाया भुगतान करने में सरकारी नियमों के अनुसार 45 दिनों की तय समय-सीमा से अधिक का विलंब बिल्कुल न करें।

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