Thursday, May 7, 2026
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मध्यप्रदेश

E-Library : लाइब्रेरियां डिजीटल होतीं तो युवाओं के लिए मददगार साबित होती

जबलपुर। वर्तमान युग में जहां तमाम चीजें डिजिटल मोड पर आ चुकी हैं, वहीं दूसरी ओर शहर की एक भी लायब्रेरी डिजीटल नहीं हो सकी है।

ये सभी अब भी परम्परागत तरीके से चल रही हैं। कोरोना संक्रमण के चलते शिक्षण संस्थान बंद हैं।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हो या फिर अन्य परीक्षाओं के लिए आवश्यक नोट्स, गाइड आदि की उपलब्धता कठिन है।

संक्रमण काल में लाइब्रेरियों में ताला लगा है।गां धी लायब्रेरी शहर में प्रमुख है। यह शहर ही नहीं, प्रदेश की भी सबसे पुरानी और बड़ी लायब्रेरियों में शुमार है।

इस लायब्रेरी में 40 हजार से अधिक किताबों का संग्रह है। इस लायब्रेरी में एक साथ करीब 350 छात्र-छात्राओं के बैठने की व्यवस्था है। सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक यहां युवा पहुंचते हैं।

स्मार्ट सिटी के माध्यम से टाउन हाल लायब्रेरी को डिजीटल मोड पर लाने की कवायद वर्ष 2018 से चल रही है। वर्ष 2020 में लायब्रेरी को डिजीटल हो जाना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

किताबों को ऑनलाइन माड्यूल में कनवर्ट करने, किताबों की टेगिंग, कोड जनरेट जैसे काम अभी 70 फीसदी हो सके हैं।

जिले में प्रांतीय शिक्षा महाविद्यालय, रानीताल लायब्रेरी, सेंट्रल लायबेेरी जैसे शासकीय ग्रंथालय हैं। इन्हें आधुनिक बनाने के लिए फिलहाल कोई योजना नहीं है।

स्मार्ट सिटी के सीईओ आशीष पाठक ने बताया कि स्मार्ट सिटी के माध्यम से गांधी भवन लायब्रेरी को डिजीटल किया जा रहा है।

इसमें फर्नीचर, रिनोवेशन के साथ डिजीटलाइजेशन जैसे कई कम्पानेंट शामिल हैं। बहुत कुछ काम कर लिया गया है।

कोशिश है अगले दो से तीन माह में शेष काम पूरा कर इसे डिजीटल मोड पर ला दिया जाएगा

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम