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मूल्यांकन में लापरवाही नहीं होगी माफ: शिक्षक पर हो सकती है अनुशासनात्मक कार्रवाई

जबलपुर। माध्यमिक शिक्षा मंडल की बारहवीं की कापियों के मूल्यांकन में कोई शिक्षक लापरवाही करता है तो उस पर दंड अधिरोपित किया जाएगा। अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

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ऐसी बात बुधवार को मूल्यांकन केंद्र महारानी लक्ष्मीबाई कन्या उमावि में निरीक्षण के दौरान माशिमं के सम्भागीय अधिकारी इब्राहिम नंद ने कही।

उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने प्राचार्य प्रभा मिश्रा से व्यवस्थाओं की जानकारी ली। वैल्यूअर की कमी को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षकों को नोटिस जारी कर मूल्यांकन केंद्र में उपस्थित होने के लिए कहा था।

इसके बाद भी महज 31 शिक्षक पहुंचे। वैल्यूशन के लिए 270 शिक्षकों की तैनाती की गई है। जबकि, सोमवार को 90 शिक्षक थे, मंगलवार को 104 और बुधवार को 135 शिक्षक ही पहुंचे। अभी तक 8 हजार कापियों की जांच हुई है।

…तो स्कूलों की मान्यता की जा सकती है रद्द
स्कूल शिक्षा विभाग ने कक्षा एक से पांच तक के बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई को प्रतिबंधित कर दिया है। इसके बाद भी कई स्कूल जबरिया पढ़ाई करा रहे हैं। विभाग ऐसे स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा। जिसमें स्कूल की मान्यता भी समाप्त की जा सकती है। जिला शिक्षा विभाग इस दिशा में जानकारी जुटा रहा है। आयुक्त राज्य शिक्षा केंद्र लोकेश जाटव ने उक्त सम्बंध में आदेश जारी किए थे। जिला शिक्षा अधिकारी सुनील नेमा ने बताया कि यदि कोई स्कूल ऐसी कक्षाएं लगा रहा है तो उस के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की जाएगी।

सरकार का निर्णय पढ़ाई से कर रहा दूर
सरकार द्वारा स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों की परीक्षाएं न लेकर उन्हें जनरल प्रमोशन देने के निर्णय को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने नाराजगी जताई है। परिषद ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर इसे अव्यवहारिक बताया है। अभाविप ने कहा है कि अंतिम वर्ष के छात्रों की परीक्षा लिए बगैर उनका मूल्यांकन करना सरकार को घोषित की हुई पद्धति का पुनर्विचार करना चाहिए। सरकार वैकल्पिक मूल्यांकन की योजना कर स्नातक अंतिम वर्ष व स्नातकोत्तर अंतिम सेमेस्टर के विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य की चिंता करे। वैकल्पिक मूल्यांकन के समय भी उपस्थित होने में असमर्थ छात्रों के लिए भी एक अवसर मूल्यांकन का दिया जाए। अभाविप के प्रांत कार्यालय मंत्री नीलेश साहू ने कहा है कि प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपक निर्णय पर पुर्नविचार करने की मांग की है।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम