बेटे के कातिलों को फांसी नहीं, उम्रकैद दो ताकि वो रोज तड़पें”-शुभेंदु के PA की मां की पुकार
बेटे के कातिलों को फांसी नहीं, उम्रकैद दो ताकि वो रोज तड़पें”-शुभेंदु के PA की मां की पुकार। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी के पीए (PA) चंद्रनाथ रथ की निर्मम हत्या के बाद राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर है। इस बीच, मृतक चंद्रनाथ की मां हसीरानी रथ का एक हृदयविदारक बयान सामने आया है, जिसने इस पूरी घटना को एक मानवीय और भावुक मोड़ दे दिया है।

“फांसी नहीं, ताउम्र जेल में तड़पें हत्यारे”
बेटे को खोने के गम में डूबी हसीरानी रथ ने दोषियों के लिए कड़ी सजा की मांग की है, लेकिन उनकी मांग पारंपरिक सजा से थोड़ी अलग है। उन्होंने कहा:
“मैं एक मां हूं, इसलिए मैं अपने बेटे के हत्यारों के लिए फांसी की सजा नहीं चाहती। मैं चाहती हूं कि उन्हें उम्रकैद मिले, ताकि वे अपनी पूरी जिंदगी जेल की सलाखों के पीछे पछतावे और दर्द में गुजारें।”
राजनीतिक रंजिश का लगाया आरोप
हसीरानी रथ ने इस हत्याकांड को पूरी तरह से राजनीतिक बताते हुए सत्ताधारी दल पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि उनके परिवार को 4 मई (चुनाव परिणामों) के बाद से ही धमकियां मिल रही थीं। उनके अनुसार, हमलावरों ने उसी भड़काऊ बयान को सच कर दिखाया जिसमें कहा गया था कि “4 तारीख के बाद दिल्ली के लोग भी नहीं बचा पाएंगे।”
उन्होंने आगे कहा, “अगर मेरा बेटा किसी हादसे में मरता तो इतना दुख नहीं होता, लेकिन उसे प्रताड़ित कर मारा गया। जब से शुभेंदु बाबू ने ममता बनर्जी को हराया है, हमारा परिवार खतरे में है।”
शुभेंदु अधिकारी का पलटवार: “यह सोची-समझी हत्या है”
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए शुभेंदु अधिकारी ने इसे एक ‘प्री-प्लान्ड मर्डर’ (पूर्व नियोजित हत्याकांड) करार दिया है। उन्होंने बताया कि हत्यारों ने वारदात को अंजाम देने से पहले 2-3 दिनों तक इलाके की रेकी की थी।
TMC ने की CBI जांच की मांग
मामले के तूल पकड़ते ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) का भी पहला बयान सामने आया है। पार्टी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि इस मामले की कोर्ट की निगरानी में CBI जांच होनी चाहिए ताकि सच सामने आ सके।
घटनाक्रम पर एक नज़र:
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वारदात: मध्यग्राम के पास चंद्रनाथ रथ पर ताबड़तोड़ फायरिंग।
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आरोप: बीजेपी ने TMC कार्यकर्ताओं पर लगाया हत्या का आरोप।
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सुरक्षा: पूरे इलाके में भारी पुलिस बल और केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात।
यह घटना 2026 के विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद बंगाल में जारी राजनीतिक हिंसा के गंभीर चेहरे को उजागर करती है।

