परम पूज्य गुरुदेव “दद्दा जी” की असीम कृपा से दद्दा धाम में भव्य “प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव” में पहुँचे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

 

कटनी। गृहस्थ संत परम पूज्य गुरुदेव अनंत विभूषित पंडित देव प्रभाकर शास्त्री “दद्दा जी” की असीम कृपा से झिंझरी स्थित श्रीकृष्ण वृद्ध आश्रम प्रांगण, दद्दा धाम में 09 से 13 नवंबर 2025 तक चल रहे “प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव” के पावन अवसर पर आज मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पधारे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सर्वप्रथम पूज्य गुरुदेव दद्दा जी की समाधि स्थल पर पहुँचकर पुष्पांजलि अर्पित की और आशीर्वाद प्राप्त किया। तत्पश्चात उन्होंने विग्रह में विराजमान दद्दा जी की प्रतिमा पर पुष्प समर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
इस अवसर पर खजुराहो सांसद विष्णुदत्त शर्मा, स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा समाजसेवी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सम्पूर्ण स्वागत एवं व्यवस्था की अगुवाई पूर्व मंत्री एवं विधायक संजय सत्येन्द्र पाठक द्वारा की गई, जिन्होंने मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत कर उन्हें दद्दा धाम के आध्यात्मिक आयामों से परिचित कराया।
धर्म, अध्यात्म और भक्ति का अद्वितीय संगम
यह महोत्सव धर्म, अध्यात्म और भक्ति का अद्भुत संगम है, जहाँ विश्वकल्याण हेतु असंख्य पार्थिव शिवलिंग निर्माण, महारुद्राभिषेक एवं अमृतमयी कथा का आयोजन हो रहा है। प्रातःकाल शिव आराधना और संध्याकाल हरिकथा एवं भजन संध्या के माध्यम से दद्दा धाम में दिव्यता का आलोक व्याप्त है।
पूज्य दद्दा जी — कर्मयोगी ऋषिराज, संकल्प के पर्याय
गृहस्थ जीवन में रहते हुए सनातन धर्म के उत्थान के लिए निरंतर कार्यरत परम पूज्य दद्दा जी को सम्पूर्ण विश्व “संकल्प मूर्ति” के रूप में जानता है।
अपने पूज्य गुरु धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के आशीर्वाद से आपने राष्ट्रकल्याण हेतु 11 बार सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण महारुद्र यज्ञ के संकल्प को पूर्ण किया, वहीं स्वयं 45 बार यह यज्ञ सम्पन्न किया। 2016 में उज्जैन महाकुंभ में 108वें यज्ञ के साथ गुरु-शिष्य परंपरा के इस विराट संकल्प की पूर्णाहुति की।
हरिहरात्मक यज्ञ — आध्यात्मिक एकता का प्रतीक
पूज्य दद्दा जी ने धर्म के विभाजन को मिटाते हुए “हर-हर महादेव” और “हरि बोल” दोनों के अद्भुत संगम को “हरिहरात्मक यज्ञ” के रूप में प्रस्तुत किया — जो शिव और श्रीकृष्ण की आराधना को एक ही मंडप में जोड़ता है।
आपके दिव्य मार्गदर्शन में अब तक 131 यज्ञ सम्पन्न हो चुके हैं, जिनमें लगभग 6 अरब पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण हुआ है — जो विश्व इतिहास में एक अनुपम अध्याय है।

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