चातुर्मास 2026: 25 जुलाई से चार महीनों के लिए योगनिद्रा में जाएंगे भगवान विष्णु, देवशयनी एकादशी पर बन रहा है दुर्लभ ‘त्रिवेणी संयोग’

चातुर्मास 2026: 25 जुलाई से चार महीनों के लिए योगनिद्रा में जाएंगे भगवान विष्णु, देवशयनी एकादशी पर बन रहा है दुर्लभ 'त्रिवेणी संयोग'

चातुर्मास 2026: 25 जुलाई से चार महीनों के लिए योगनिद्रा में जाएंगे भगवान विष्णु, देवशयनी एकादशी पर बन रहा है दुर्लभ ‘त्रिवेणी संयोग’

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाले चातुर्मास की शुरुआत इस साल 25 जुलाई 2026 से होने जा रही है. देवशयनी एकादशी के पावन दिन से शुरू होकर यह काल 20 नवंबर 2026 को देवप्रबोधिनी एकादशी के दिन समाप्त होगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन चार महीनों में भगवान विष्णु क्षीर सागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और इस अवधि में पूरी सृष्टि के संचालन का उत्तरदायित्व महादेव (भगवान शिव) संभालते हैं.

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देवशयनी एकादशी पर तीन शुभ योगों का महासंयोग

इस साल चातुर्मास की शुरुआत यानी देवशयनी एकादशी का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास होने वाला है. ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, इस दिन एक साथ तीन बेहद शुभ योग बन रहे हैं, जिसे ‘त्रिवेणी संयोग’ कहा जा रहा है:

  1. सर्वार्थ सिद्धि योग
  2. अमृत सिद्धि योग
  3. रवि योग

 मंदिरों में विशेष तैयारियां:

इस महासंयोग के चलते देश भर के आराध्य मंदिरों में भगवान विष्णु के विशेष पूजन की तैयारियां की जा रही हैं. इस शुभ दिन पर विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ, व्रत-उपवास और भजन-कीर्तन करना श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है.

— आध्यात्मिक एवं धर्म-संस्कृति डेस्क, विशेषांक

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