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Skyroot Vikram 1 Launch: अंतरिक्ष में गूंजा वंदे मातरम- स्काईरूट के पहले निजी रॉकेट ‘विक्रम-1’ की 5 ऐतिहासिक खूबियां

Skyroot Vikram 1 Launch: अंतरिक्ष में गूंजा वंदे मातरम- स्काईरूट के पहले निजी रॉकेट 'विक्रम-1' की 5 ऐतिहासिक खूबियां

Skyroot Vikram 1 Launch: अंतरिक्ष में गूंजा वंदे मातरम- स्काईरूट के पहले निजी रॉकेट 'विक्रम-1' की 5 ऐतिहासिक खूबियां

Skyroot Vikram 1 Launch: अंतरिक्ष में गूंजा वंदे मातरम- स्काईरूट के पहले निजी रॉकेट ‘विक्रम-1’ की 5 ऐतिहासिक खूबियां

श्रीहरिकोटा/हैदराबाद: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के गौरवशाली इतिहास में आज एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है. भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक बार फिर इतिहास रचते हुए अपने पहले प्राइवेट (निजी) ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ (Vikram-1) का सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है.

आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC) से ‘विक्रम-1’ ने अंतरिक्ष की ओर उड़ान भरी. यह भारत में पूरी तरह से डिजाइन और विकसित किया गया पहला निजी रॉकेट है, जिसे हैदराबाद स्थित स्पेस-टेक स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) ने तैयार किया है.

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 ‘मिशन आगमन’: भारतीय निजी स्पेस सेक्टर के लिए नया सवेरा

बता दें कि भारत में बने पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट की इस पहली उड़ान को ‘मिशन आगमन’ (Mission Aagman) नाम दिया गया है. यह न केवल स्काईरूट एयरोस्पेस के लिए, बल्कि भारत के पूरे निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जो भविष्य में बड़े कमर्शियल लॉन्च के द्वार खोलेगा.

PM मोदी ने इसे बताया ‘ऐतिहासिक नई शुरुआत’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉन्चिंग से ठीक पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट करके इस मिशन को ‘ऐतिहासिक नई शुरुआत’ करार दिया: Skyroot Vikram 1 Launch: अंतरिक्ष में गूंजा वंदे मातरम- स्काईरूट के पहले निजी रॉकेट ‘विक्रम-1’ की 5 ऐतिहासिक खूबियां

“भारत की अंतरिक्ष यात्रा के लिए एक ऐतिहासिक नई शुरुआत! स्काईरूट एयरोस्पेस भारत के पहले निजी तौर पर विकसित लॉन्च व्हीकल, ‘विक्रम-1’ का पहला ऑर्बिटल लॉन्च करेगा. यह चार-चरण वाला रॉकेट तेजी से और जरूरत के हिसाब से लॉन्च सेवाएं देने के लिए बनाया गया है. यह मिशन हमारे युवाओं की प्रतिभा, दृढ़ संकल्प और उद्यमिता की भावना को दर्शाता है. यह ये भी दिखाता है कि कैसे हमारे अंतरिक्ष-क्षेत्र के सुधार इनोवेशन और उद्यम के लिए नए अवसर खोल रहे हैं. सफल लॉन्च के लिए स्काईरूट एयरोस्पेस की पूरी टीम को मेरी शुभकामनाएं. विक्रम-1 ऊंचाइयां छुए, इतिहास रचे और इनोवेटर्स की एक पीढ़ी को प्रेरित करे. मैं सभी भारतीयों, खासकर अपने युवा दोस्तों से आग्रह करता हूं कि वे इस ऐतिहासिक मिशन को देखें और #IndiaWithVikram1 का इस्तेमाल करके टीम स्काईरूट को सफलता के लिए शुभकामनाएं दें.” — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

‘विक्रम-1’ रॉकेट में क्या-क्या है खास? जानें 5 बड़ी खूबियां

स्काईरूट एयरोस्पेस का यह रॉकेट कई मायनों में अनूठा और तकनीकी रूप से उन्नत है. आइए जानते हैं इसकी प्रमुख विशेषताएं:

  1.  भारी पेलोड क्षमता: ‘विक्रम-1’ रॉकेट तकनीकी उपकरणों (पेलोड) को धरती से 450 किलोमीटर ऊपर एक खास कक्षा में स्थापित करने के लिए डिजाइन किया गया है. यह 350 किलोग्राम तक का वजन अंतरिक्ष में ले जाने में सक्षम है.

  2.  कार्बन-कंपोजिट स्ट्रक्चर: यह पूरी तरह से हल्के लेकिन बेहद मजबूत कार्बन-कंपोजिट स्ट्रक्चर से बना भारत का पहला ऑर्बिटल रॉकेट है. गौरतलब है कि कार्बन फाइबर स्टील की तुलना में पांच गुना हल्का होता है, जिससे रॉकेट की दक्षता बढ़ती है.

  3. 3D प्रिंटेड इंजन: इस रॉकेट में कंपनी द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित इंजन लगे हैं, जिनमें अत्याधुनिक 3D प्रिंटेड इंजन भी शामिल हैं. यह तकनीक निर्माण को तेज और सटीक बनाती है.

  4.  सोने का आर्ट पीस: इस मिशन में अंतरिक्ष में एक माइक्रो-आर्ट पीस छोटा सा रॉकेट भी भेजा गया है. यह अनोखा आर्ट पीस 18 कैरेट सोने से बना है.

  5.  PM मोदी का हस्तलिखित पोस्टकार्ड: ‘मिशन आगमन’ को और भी यादगार बनाने के लिए, ‘विक्रम-1’ रॉकेट में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लिखा गया एक हस्तलिखित पोस्टकार्ड भी अंतरिक्ष की यात्रा पर गया है.

रॉकेट का नाम ‘विक्रम-1’ क्यों रखा गया?

इस रॉकेट का नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक और दूरदर्शी वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में ‘विक्रम-1’ रखा गया है. डॉ. साराभाई ने ही देश के स्पेस सेक्टर की मजबूत नींव रखी थी.

स्काईरूट एयरोस्पेस अपने सभी रॉकेट्स के नाम उनके सम्मान में इसी सीरीज (विक्रम सीरीज) पर रखती है. चूंकि यह भारत के पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट की लॉन्चिंग थी, इसलिए इसे ‘विक्रम-1’ नाम दिया गया है.

— विशेष विज्ञान एवं अंतरिक्ष ब्यूरो, विशेषांक

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