केरल में बीजेपी का ‘चथन्नूर मॉडल’: मिस्ड-कॉलर सदस्य से ऐसे विधानसभा में पार्टी के सबसे बड़े नेता बने रिटायर्ड हेडमास्टर गोपाकुमार
तिरुवनंतपुरम: अपने अप्रत्याशित और चौंकाने वाले सांगठनिक फैसलों के लिए मशहूर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने केरलम में एक बार फिर सबको हैरान कर दिया है। हाल ही में संपन्न हुए केरल विधानसभा चुनाव में इतिहास रचते हुए बीजेपी को 3 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। कयास लगाए जा रहे थे कि सदन में पार्टी का नेतृत्व कोई बड़ा और अनुभवी चेहरा करेगा, लेकिन दिल्ली से आए एक फैसले ने राज्य के राजनीतिक पंडितों को खामोश कर दिया है।
बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके दिग्गज नेताओं—राजीव चंद्रशेखर और वी. मुरलीधरन—की मौजूदगी के बावजूद, बेहद कम चर्चित और जमीनी नेता बी.बी. गोपाकुमार को केरल विधानसभा में अपने विधायी दल का नेता (Leader of Legislative Party) घोषित कर दिया है।
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4 हफ्ते के सस्पेंस के बाद सत्र से ठीक पहले ऐलान
केरल में चुनाव परिणाम घोषित हुए करीब 4 हफ्ते बीत चुके हैं। इस दौरान विधानसभा ने नए स्पीकर का चुनाव भी कर लिया था, लेकिन बीजेपी ने अपने पत्ते नहीं खोले थे। अब विधानसभा सत्र शुरू होने से ठीक दो दिन पहले बुधवार को इस नाम पर अंतिम मुहर लगी।
“मेरे चयन ने मुझे ही चौंका दिया”
विधायी दल का नेता चुने जाने के बाद खुद बी.बी. गोपाकुमार ने अपनी हैरानी जताते हुए कहा, “इस फैसले ने मुझे खुद अचंभित कर दिया है। मुझे इस बारे में तब पता चला, जब पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और हमारे वरिष्ठ साथी राजीव चंद्रशेखर ने मुझे फोन पर इसकी जानकारी दी। विधानसभा में मैं केरल की जनता और बीजेपी की मजबूत आवाज बनूंगा।”
‘डार्क हॉर्स’ गोपाकुमार: LDF के अभेद्य गढ़ में ऐसे खिलाया ‘कमल’
बी.बी. गोपाकुमार को केरल की राजनीति में इस बार का सबसे बड़ा ‘डार्क हॉर्स’ (अप्रत्याशित रूप से उभरने वाला नेता) माना जा रहा है।
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कम्युनिस्टों के किले में सेंध: गोपाकुमार ने केरल की चथन्नूर (Chathannoor) विधानसभा सीट से जीत हासिल की है। यह सीट साल 2006 से लगातार वामपंथी मोर्चे (LDF) की घटक दल सीपीआई (CPI) का सबसे मजबूत गढ़ रही थी।
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सोशल प्रोफाइल: गोपाकुमार एक रिटायर्ड स्कूल हेडमास्टर हैं और स्थानीय स्तर पर बेहद प्रभावशाली ‘हिंदू एझवा’ (Ezhava) समुदाय का एक जाना-पहचाना चेहरा हैं।
‘मिस्ड-कॉल’ सदस्य से नेता तक: 2 बार हारने के बाद रचा इतिहास
गोपाकुमार का राजनीतिक सफर इस बात का सबूत है कि आरएसएस और बीजेपी में जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को क्या मुकाम मिल सकता है:
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पार्टी में एंट्री: गोपाकुमार करीब एक दशक पहले बीजेपी के एक ‘मिस्ड-कॉल सदस्यता अभियान’ के जरिए संगठन से जुड़े थे।
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लगातार संघर्ष की कहानी: कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए गोपाकुमार ने चथन्नूर सीट से लगातार तीन बार अपनी किस्मत आजमाई।
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2016 (पहला प्रयास): महज $24.92\%$ वोट शेयर मिला और हार गए।
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2021 (दूसरा प्रयास): वोट शेयर बढ़कर $30.61\%$ हुआ, लेकिन जीत नहीं सके।
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2026 (तीसरा प्रयास): अगले 5 साल आरएसएस (RSS) के स्वयंसेवकों के साथ मिलकर इन्होंने जमीन पर साइलेंट काम किया। नतीजा यह रहा कि 2026 के चुनाव में उन्होंने $38.54\%$ वोट हासिल कर सीपीआई के आर. राजेंद्रन को पटखनी दे दी।
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क्या है यह ‘चथन्नूर मॉडल’?
राजनीतिक गलियारों में अब ‘चथन्नूर मॉडल’ की चर्चा तेज है। गोपाकुमार का मानना है कि इस मॉडल (आरएसएस का जमीनी नेटवर्क + जनता के बीच लगातार सक्रियता) को केरल की उन सभी सीटों पर दोहराया जा सकता है, जहां बीजेपी के जीतने की उम्मीद है।
दो पूर्व केंद्रीय मंत्रियों की जगह गोपाकुमार को आगे कर बीजेपी ने यह साफ संदेश दे दिया है कि पार्टी अब राज्य में बड़े चेहरों के बजाय कैडर-बेस्ड और जमीन से जुड़े स्थानीय नेतृत्व को तैयार करने पर फोकस कर रही है।
