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ISRO Makes History: अंतरिक्ष में इसरो का नया चमत्कार; भारत ने लॉन्च किया पहला ‘सेल्फ-पावर्ड’ सैटेलाइट, कचरे और धूप से खुद बनाएगा अनलिमिटेड बिजली

श्रीहरिकोटा: भारत के वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष विज्ञान में एक और अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अपने भरोसेमंद लॉन्च व्हीकल के जरिए भारत का पहला ‘सेल्फ-पावर्ड’ सैटेलाइट (Self-Powered Satellite) अंतरिक्ष की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया है।

इस सैटेलाइट की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी खासियत यह है कि अंतरिक्ष में इसके काम करने के लिए बिजली (Power Supply) की कमी कभी नहीं होगी। यह उपग्रह अनंत काल तक अंतरिक्ष में खुद ही ऊर्जा पैदा करने और उसे रीसायकल करने में सक्षम है, जो भारत को डीप-स्पेस मिशन्स (Deep Space Missions) में दुनिया के सबसे अग्रणी देशों की कतार में खड़ा करता है।

कैसे काम करता है यह ‘मल्टी-सोर्स पावर सिस्टम’?

आमतौर पर सैटेलाइट्स की एक निश्चित उम्र होती है, क्योंकि उनके सोलर पैनल्स समय के साथ कमजोर हो जाते हैं या बैटरी बैकअप खत्म होने से वे ‘स्पेस डेब्रिस’ (अंतरिक्ष का कचरा) बन जाते हैं। लेकिन इसरो का यह नया सैटेलाइट एक बेहद एडवांस हाइब्रिड टेक्नोलॉजी पर काम करता है:

देश को क्या होगा फायदा? इंटरनेट और GPS की स्पीड होगी दोगुनी

इसरो प्रमुख के अनुसार, यह तकनीक भारत के भविष्य के अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए एक “गेम-चेंजर” साबित होने वाली है।

  • कम्युनिकेशन में क्रांति: बिजली की बिना किसी रुकावट के लगातार सप्लाई होने के कारण, यह सैटेलाइट भारत के सुदूर इलाकों में हाई-स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट और बेहद सटीक NavIC (भारतीय GPS) नेविगेशन सिग्नल को 24 घंटे बिना किसी लैग (Lag) के ब्रॉडकास्ट करेगा।

  • मिशन लाइफ होगी अनलिमिटेड: बिजली की कमी न होने के कारण इस सैटेलाइट की कार्य अवधि पारंपरिक सैटेलाइट्स की तुलना में दोगुनी से भी अधिक होगी, जिससे देश के करोड़ों रुपये की बचत होगी।

 ‘जीरो डेब्रिस’ मिशन की ओर भारत का मजबूत कदम

भारत ने साल 2030 तक अंतरिक्ष को कचरा मुक्त बनाने (Debris Free Space Mission) का संकल्प लिया है। यह ‘सेल्फ-पावर्ड’ तकनीक उस दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है। चूंकि यह सैटेलाइट बिजली की कमी से कभी मृत (Defunct) नहीं होगा, इसलिए यह अंतरिक्ष में मलबे के रूप में नहीं भटकेगा। अपना मिशन पूरा होने के बाद, यह अपनी ही बची हुई पावर का इस्तेमाल कर खुद को सुरक्षित रूप से पृथ्वी के वायुमंडल में लाकर नष्ट कर सकेगा।

दुनिया रह गई दंग: नासा (NASA) और यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) सहित दुनिया के कई बड़े देशों के वैज्ञानिक संगठन इसरो की इस किफायती और बेहद उन्नत ‘अक्षय ऊर्जा’ (Renewable Space Energy) तकनीक को देखकर हैरान हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी इस सफलता पर इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए इसे ‘आत्मनिर्भर भारत का अंतरिक्ष में एक नया और ऊर्जावान सवेरा’ बताया है।

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