RBI Annual Report 2026: जेब में रखे कागजी नोट होंगे बंद-अब भारत में चलेंगे ‘प्लास्टिक के नोट’; e-Rupee को लेकर भी RBI का बड़ा ऐलान
मुंबई/नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की अर्थव्यवस्था और बैंकिंग सिस्टम को पूरी तरह से आधुनिक बनाने की दिशा में दो बड़े और ऐतिहासिक कदमों का रोडमैप तैयार कर लिया है। शुक्रवार को जारी अपनी वित्त वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में केंद्रीय बैंक ने साफ किया है कि वह देश में बढ़ते कैश की मांग और नोटों की छपाई की भारी लागत से निपटने के लिए ‘प्लास्टिक के नोट’ (Polymer Bank Notes) चलाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
इसके साथ ही, आरबीआई देश की अपनी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) यानी डिजिटल रुपये (e-Rupee) का दायरा सरकारी योजनाओं और विदेशों से होने वाले लेन-देन (Cross-Border Transactions) तक बढ़ाने जा रहा है।
कागजी नोटों की जगह क्यों लेंगे ‘प्लास्टिक के नोट’?
भारत में त्योहारों और शादियों के सीजन में कैश की डिमांड रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाती है, जिससे कागज के नोट जल्दी फट जाते हैं या खराब हो जाते हैं। इसी समस्या का समाधान प्लास्टिक नोट हैं:
लंबी उम्र और कम लागत: प्लास्टिक (पॉलिमर) से बने नोट कागजी नोटों की तुलना में कई गुना ज्यादा चलते हैं। ये पानी में भीगने पर खराब नहीं होते और इन्हें फाड़ना लगभग असंभव होता है। इससे बार-बार नोट छापने का सरकारी खर्च बचेगा।
दुनिया के 60 देशों में सफल: दुनिया भर के करीब 60 देश पहले से ही पॉलिमर बैंक नोटों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी शुरुआत सबसे पहले 1988 में ऑस्ट्रेलिया ने 10 डॉलर का नोट छापकर की थी। आज सिंगापुर, इंडोनेशिया, थाईलैंड और मलेशिया जैसे देश पूरी तरह प्लास्टिक करेंसी पर शिफ्ट हो चुके हैं।
अब ‘डिजिटल रुपये’ से मिलेगी फूड सब्सिडी और सरकारी लाभ
आरबीआई अपनी डिजिटल करेंसी (e-Rupee) को देश के ग्रामीण और शहरी इलाकों में गहराई से उतारने के लिए ‘वेलफेयर पेमेंट्स’ का सहारा ले रहा है:
सफल रहे पायलट प्रोजेक्ट: वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान आरबीआई ने गुजरात, पुडुचेरी और चंडीगढ़ जैसे राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में सीबीडीसी (CBDC) से जुड़े कई वेलफेयर प्रोग्राम सफलतापूर्वक चलाए। इसके तहत लाभार्थियों को सीधे ई-रुपये के जरिए फूड सब्सिडी ट्रांसफर की गई।
प्रोग्रामेबल DBT स्कीम्स: केंद्रीय बैंक ने बताया कि कई सरकारी एजेंसियों ने डिजिटल रुपये की ‘प्रोग्रामेबिलिटी’ (Programmability Feature) का इस्तेमाल करके डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) का ट्रायल शुरू किया है। इसका मतलब है कि सरकार जिस काम (जैसे खाद, बीज या राशन) के लिए पैसा भेजेगी, वह ई-रुपी सिर्फ उसी दुकान पर स्कैन हो सकेगा, जिससे भ्रष्टाचार और पैसों की हेराफेरी पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
विदेशों में भी गूंजेगा डिजिटल रुपये का डंका
आरबीआई का अगला बड़ा टारगेट ई-रुपये को बॉर्डर-पार ट्रांजैक्शन (Cross-Border Transactions) के लिए तैयार करना है। अगर यह योजना पूरी तरह लागू होती है, तो विदेशों में रहने वाले भारतीय बिना किसी भारी-भरकम ट्रांसफर फीस या थर्ड-पार्टी ऐप के, सीधे भारत में मौजूद अपने रिश्तेदारों को डिजिटल रुपया भेज सकेंगे। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी भारतीय करेंसी को बड़ी मजबूती मिलेगी।