Tuesday, May 26, 2026
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इसी बहाने

आशीष शुक्ला

अजब गजबFEATUREDLatestइसी बहानेउत्तरप्रदेशराष्ट्रीय

Totli Dulhan: विदाई से पहले सामने आई सच्चाई… दूल्हे ने कहा– अब नहीं होगी ये शादी

Totli Dulhan: विदाई से पहले सामने आई सच्चाई… दूल्हे ने कहा– अब नहीं होगी ये शादी। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज

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FEATUREDइसी बहाने

Prayagraj Crime Breaking: उमेश पाल हत्याकांड के आरोपी नफीस को पुलिस मुठभेड़ में लगी गोली, ले जाया गया अस्पताल

Prayagraj Crime Breaking: उमेश पाल हत्याकांड के आरोपी नफीस को पुलिस मुठभेड़ में लगी गोली, ले जाया गया अस्पताल

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मुस्लिम से हिंदू बनने को शादीशुदा आमिर की डीएम से गुहार, पत्नी बोली- नाटक…

मुस्लिम से हिंदू बनने के लिए शादीशुदा आमिर ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई है। आमिर की पत्नी ने कहा कि

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इसी बहाने

दिल्ली का दिल किसने तोड़ा? हिंदुस्तान रो दिया…

इसी बहाने (आशीष शुक्‍ला) । कहते हैं इतिहास दोहराता है। इतिहास दोहराने के कई उदाहरण भी अक्सर देखने मिलते हैं,

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yashbharatइसी बहाने

इसी बहाने-उगलने के बावजूद कम नहीं होता जहर

देश की राजनीति में इन दिनों जहर जमकर उगलने का सिलसिला जारी है किंतु खास यह नहीं बल्कि यह है कि इतना जहर उगलने के बाद भी यह कम नहीं हो रहा।

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इसी बहाने : ढाई आखर प्रेम के, तीन अक्षर पर रार, चार का पता नहीं..!

कटनी। कबीर ने ढाई आखर प्रेम की परिभाषा बताई तब दुनिया ने उसे स्वीकार किया आज ढाई की जगह तीन

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शौर्य और साहस के गुणगान से चुनावी गालियों पर आकर ठिठका प्रचार

इसी बहाने ( आशीष शुक्‍ला )। अमूमन चुनावी प्रचार शुरू हुआ तो सेना के शौर्य और साहस का गुणगान खूब

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इसी बहाने

फिलहाल लोक की बारी फिर तंत्र के आगे बेचारी

इसी बहाने(आशीष शुक्‍ला)। लोकतंत्र का महापर्व है, खुशियां बिखरीं हैं। भले ही अब चुनावी उत्सव का नजारा आयोग की बेड़ियां

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इसी बहाने: कोस-कोस पर पानी बदले, चार कोस में वानी

परिणामों को लेकर चर्चा कुछ यूं.. हावत बचपन से बुजुर्गों को मुख से सुनी जाती रही है कि कोस-कोस पर

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इसी बहाने: उपेक्षित कार्यकर्ता के अपेक्षित बनने का वक्त

म कार्यकर्ताओं की बल्ले -बल्ले का समय चल निकला है। कहावत याद आने लगी है चार दिन की चांदनी फिर

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इसी बहाने : नवरात्रि पंडाल औऱ माननीयों की भक्ति

वैसे तो नवरात्र हर साल शहर गांव में उत्साह के नो दिनों के लिए प्रसिद्व हैं। देश ही क्या दुनिया

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इसी बहानेमध्यप्रदेश

सरकारें आएंगी-जाएंगी, मगर यह देश रहना चाहिये, इस देश का लोकतंत्र रहना चाहिये..

इसी बहाने (आशीष शुक्‍ला )। चुनाव की आचार संहिता किसी भी पल लग जायेगी तब माननीयों की वर्तमान की दूरदर्शिता ही

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हलो, हलो में कट रही जिंदगी

इसी बहाने(आशीष शुक्‍ला)। आज से कुछ साल पहले फोन पर हलो की आवाज बेहद कर्णप्रिय हुआ करती थी अब यही आवाज

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घरों के फासले घटे, दिलों के बढ़ गए

इसी बहाने (आशीष शुक्‍ला)। आज जैसे-जैसे शहरों की बसाहट हरियाली के बीच क्रांक्रीट के जंगल के रूप में फैलती जा रही

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मौसम चुनावी है राहत की बारिश तो होगी ही

इसी बहाने (आशीष शुक्‍ला )। मौसम मानसूनी भले ही देश मे जल प्रलय के हालात पैदा कर रहा हो, लेकिन मौसम

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यहां तो समर्थन का भी तय होता है मूल्य!

इसी बहाने (आशीष शुक्‍ला )।  चर्चा पिछले कुछ घंटों से छाई है। हम भी चर्चा में शामिल हैं। कुछ को

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