नई दिल्ली. नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा से पास हो गया। इसके पक्ष में 311 जबकि विपक्ष में 80 वोट पड़े। अब राज्यसभा में बिल पेश होगा। यहां सरकार की अग्नि परीक्षा होगी।
गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकता बिल में धार्मिक आधार पर भेदभाव से इनकार किया है। सोमवार रात को बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए शाह ने कहा- 1951 में देश में 9.8% मुस्लिम थे, आज 14.23% बढ़कर हो गए हैं। हमने धार्मिक आधार पर किसी से भेदभाव नहीं किया। चर्चा के दौरान एआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने नागरिकता संशोधन बिल की कॉपी फाड़ी। ओवैसी ने कहा कि यह बिल एक और बंटवारा करवाने जा रहा है। यह बिल हिटलर के कानून से भी बदतर है। एआईएमआईएम सांसद ने कहा कि अमित शाह चीन से डरते हैं। हालांकि, चेयर पर बैठी रमादेवी ने इस घटना को सदन की कार्यवाही से बाहर करने के निर्देश दिए।
शाह ने कहा कि यह बिल अल्पसंख्यकों के 0.001% भी खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों ने ऐसा किया और तब किसी ने विरोध नहीं किया था। गृह मंत्री ने कहा कि 1947 में पूर्व और पश्चिमी पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को भारत ने नागरिकता दी थी, तभी मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री और लाल कृष्ण आडवाणी उप-प्रधानमंत्री बन सके। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस यह साबित कर दे कि बिल भेदभाव करता है, तो मैं इसे वापस ले लूंगा। शाह ने कहा, “पक्ष और विपक्ष दोनों दलों के 48 सांसदों ने बिल पर अपनी बात रखी। यह बिल लाखों-करोड़ों शरणार्थियों के यातनापूर्ण जीवन से मुक्ति दिलाने का साधन बनने जा रहा है। ऐसे लोगों नागरिकता और सम्मान दिलाने का काम यह बिल करेगा।’